मुरादाबाद। दीपावली पर्व के दूसरे दिन शुक्रवार को गोवर्धन पूजा की गई। घरों से लेकर मंदिरों तक पूजा की धूम रही। श्रद्धालुओं ने गोवर्धन और भगवान श्री कृष्ण को छप्पन भोग अर्पित किये।
दिल्ली रोड स्थित राधा कृष्ण मंदिर में भी भजन एवं कीर्तन की धूम रही। संगीतमय भजनों पर श्रद्धालु झूमते रहे। गोवर्धन पूजा की गई और भगवान श्री कृष्ण को छप्पन भोग लगाए गए। अंत में अन्नकूट का प्रसाद वितरित किया गया।
लाल बाग स्थित स्वामी नारदानंद ऋषि आश्रम में स्वामी शारदानंद सरस्वती महाराज के तत्वावधान में गोवर्धन पूजा एवं गिरिराज कथा की गई। भगवान श्री कृष्ण को छप्पन भोग लगाए गए और सुंदर कांड का पाठ किया गया। इस्कान की टीम ने संकीर्तन कर श्री कृष्ण की भक्ति से सराबोर कर दिया। अंत में अन्नकूट का भंडारा किया गया। कुलदीप गुप्ता, सुधीर व्यास, राजीव गुप्ता, आरए शर्मा, उमा शंकर गुप्ता, संजय चित्रा, नत्थूराम कश्यप, सुभाष रस्तोगी मौजूद रहे। गीता ज्ञान मंदिर से प्रात: प्रभातफेरी निकाली गई। इसके बाद सत्संग में पं. गिरिजा भूषण मिश्र ने गोवर्धन पूजा का महत्व बताया। गोवर्धन पूजन के साथ भगवान को छप्पन भोग लगाए गए। बाद में भंडारा हुआ। अशोक सिक्का, मंजू सिक्का, श्वेता सिक्का, कृष्ण कुमार सरीन, शांति गुंबर, राज कुमारी ढल आदि का सहयोग रहा। इस्कान प्रचार समिति ने कुमार कुंज में गोवर्धन पूजा एवं भंडारा किया। कोर्ट रोड स्थित दुर्गा मंदिर में आचार्य पातीराम सिमल्टी ने गोवर्धन पर्व का महत्व बताया।चंद्र नगर स्थित श्री दुर्गा वाहिनी शिव शक्ति मंदिर में पं. यतेंद्र प्रसाद खंतवाल ने गोवर्धन की महिमा का वर्णन किया। शिव शक्ति मंदिर राम गंगा विहार, चौरासी घंटा, गंगा मंदिर, झारखंडी बाबा के मंदिर, मनोकामना श्री हनुमान मंदिर रेलवे कालोनी में भी गोवर्धन की आराधना कर भगवान श्री कृष्ण की पूजा की गई। लाल बाग स्थित काली माता के मंदिर, लाइन पार माता मंदिर, ऋण मुक्तेश्वर मंदिर आदि में भी गोवर्धन पूजा कर भगवान को भोग लगाए गए। अन्य मंदिरों में भी गोवर्धन पूजा की गई। घरों में भी गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाकर पूजा की गई। जिन घरों में सुबह पूजा की जाती है उनमें तड़के ही स्थापना कर पूजा की गई। जिन घराें में सायं पूजन होता है। उन घरों में दोपहर बाद गोवर्धन की स्थापना कर खील बताशे और चीनी के खिलौने अर्पित कर पूजा की गई। पूजा में घोसी समाज के लोगों को भी शामिल किया गया। जहां वह उपलब्ध नहीं हो सके वहीं परिवारों से स्वयं पूजा कर पूजा का सामान उन तक पहुंचाया या मंदिर में दिलवा दिया। बच्चों ने आतिशबाजी कर जश्न मनाया।