मुरादाबाद। मौसम में बदलाव के साथ बच्चों में विंटर डायरिया और निमोनिया का खतरा बढ़ गया है। इन दोनों रोगों से ग्रसित बच्चों की संख्या में इजाफा हुआ है। समय रहते बच्चों में फैल रहे इस रोग को पहचानते हुए चिकित्सक को दिखाने और बच्चे को पूरी सावधानी से रखने में ही रोग से बचाया जा सकता है।
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डा. वीर सिंह के अनुसार ठंड बढ़ने के साथ ही वातावरण में विंटर डायरिया के संक्रमण तैरने लगते हैं। इसका इंफेक्शन तीन दिन बाद असर करना शुरू करता है। बच्चे को पहले उल्टियां आती हैं और 6-7 घंटे बाद पतले दस्त शुरू हो जाते हैं। पानी की कमी से बच्चे में चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है। पेशाब कम होता जाता है और बच्चा बेचैनी महसूस करने लगता है। 6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों को यह संक्रमण अपना शिकार बनाता है। विंटर डायरिया का शिकार बच्चे को तुरंत ओआरएस का घोल, चावल का माड़, दाल का पानी या शिकंजी देना शुरू कर दें ताकि पानी की कमी का असर बच्चों पर न पड़ सके। ऐसे बच्चों को तत्काल चिकित्सक के पास ले जाएं। इसके साथ ही निमोनिया का खतरा भी बच्चों में बढ़ गया है। यह वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण वाला रोग है। खासतौर पर कम वजन वाले बच्चों, कुपोषित बच्चों जिनके शरीर में प्रतिरोधक क्षमता कम होती है उनको जल्दी जकड़ता है।