मुरादाबाद। मुहर्रम की मजलिसों में उलमा ने करबला की हकीकत बयान की। शहादत के बाद हुसैन का नाम हमेशा दुनिया में जिंदा रहेगा। यजीद का कोई नाम लेवा नहीं रहेगा। यही सच्चाई की जीत है।
मुहर्रम की जुमे को आठ तारीख थी। सुबह इमामबाड़ा अली यावर में उलमा ने मजलिस में जंग-ए-करबला पर रोशनी डाली। लाकड़ीवालान में अली हैदर जानी के इमामबाड़ा पर महिलाओं की मजलिस में भी करबला की शहादत का जिक्र किया गया। शाम को इमामबाड़ा मीर सआदत अली चौमुखापुल पर मौलाना मंसूर आबदी ने इमाम हुसैन की शहादत का अजीम शहादत करार दिया। इमामबाड़ा फरजंद अली लाकड़ीवालान और इमामबाड़ा कुली खां चौकी हसन खां में मौलाना मुशीर हसन सिरस्वी ने फरमाया कि बजाहिर तो करबला के मैदान में इमाम हुसैन को शहीद कर दिया गया। आज भी हर घर में हुसैन का नाम जिंदा है। जबकि, कोई शख्स बच्चे का नाम यजीद रखना नहीं चाहता है। दूसरी तरफ जाहिद नगर सैयद गयूर हसनैन के आवास पर मजलिस हुई। इसमें मौलाना हसन अब्बास ने करबला की शहादत बयान की। इसमें डा. रईस आगा, मोहम्मद जमा, अली असद, शबी हैदर, अमीर अब्बास, शादाब इस्लाम अख्तर, जफर अब्बास, शाह आलम, वाजिद असद आदि थे।