मुरादाबाद। थानेदार जब तक अपराधियों की कारगुजारी को समझते, क्षेत्र के लोगों से मेलजोल बढ़ाकर सूचना तंत्र मजबूत करते, ट्रांसफर हो जाता है। मार्च के महीने से जिले में यही हालात हैं। किसी थाने में पिछले आठ माह में चार थानेदार बदल चुके तो किसी में पांच। चंद थाने ही ऐसे हैं, जहां उच्चाधिकारियों ने ज्यादा हस्तक्षेप नहीं किया।
अपराधों की रोकथाम और कानून व्यवस्था जिले में सबसे बड़ा सवाल है। खुद सूूबे के मुखिया भी मुरादाबाद आकर अधिकारियों को नसीहतें दे चुके हैं। बावजूद इसके लूटपाट, छिनैती, चोरी और महिलाओं के साथ बढ़ती घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा। आंकड़े गवाही दे रहे हैं, जिन क्षेत्रों में तबादले सबसे ज्यादा हुए, वहां कानून व्यवस्था पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई है। कई थानेदार तो अब तक अपना कुशल नेटवर्क भी नहीं बना पाए।
मझोला में पिछले चार माह में आधा दर्जन हत्यारें, दर्जनों लूट और चोरी की वारदातें हो चुकीं। वहीं सिविल लाइन्स क्षेत्र में ही लूटपाट, झगड़े और जमीनी रंजिश की ढेरों घटनाएं हुईं। यही हाल कोतवाली थाना क्षेत्र का है। मार्च से अब तक यहां चार इंस्पेक्टरों के तबादले हुए।
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एक नजर
सिविल लाइन्स थाना
एसकेएस प्रताप - 7 अप्रैल 2011 से 30 मार्च 12 तक
अफसर अब्बास जैदी- 21 अप्रैल से 24 मई 2012 तक
हिंदवीर सिंह - 25 मई से 30 अगस्त 2012 तक
सतीश कुमार - 31 अगस्त से अब तक
कोतवाली थाना
अनिरुद्ध सिंह, 15 नवंबर 2011 से 7 मार्च 12 तक
अफसर अब्बास- 11 मार्च से 7 अप्रैल 2012 तक
अनिल कुमार राघव- 7 अप्रैल से 24 मई 2012 तक
एनपी सिंह - 25 मई से 17 जुलाई 2012 तक
रईसपाल सिंह - 19 जुलाई से अब तक
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थानेदारों के मार्च से अब तक स्थानांतरण
कोतवाली - चार
कटघर थाना- तीन
मझोला थाना- तीन
नागफनी - दो
सिविललाइन्स- तीन
गलशहीद - एक
मुगलपुरा - दो
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