मुरादाबाद। सांसद और विधायक सरकारी मशीनरी के व्यवहार से खफा हैं। इन्हें शिकायत है कि अधिकारी उनसे शिष्टाचार के साथ पेश नहीं आ रहे हैं। जब वह डीएम, पुलिस कप्तान या फिर दूसरे बड़े अफसरों से मुलाकात करने जाते हैं तो वह कुर्सी से खड़े भी नहीं होते। कई दफा तो कहलवा दिया जाता है कि मीटिंग चल रही है। इन शिकायतों पर भारत सरकार के संयुक्त सचिव ने भी नाराजगी जताई है।
उत्तर प्रदेश सरकार के विधायकों द्वारा कई बार जब सीधे मुख्यमंत्री के समक्ष अपने क्षेत्र के मुद्दे उठाए जाते हैं तो वह मामले संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों को भेज दिए जाते हैं। इस कंप्यूटर संदर्भ पर लिखा भी होता है कि यथा शीघ्र निस्तारण किया जाए। लेकिन कई मामले दस से पंद्रह दिनों तक ऐसे ही पड़े रह जाते हैं। जिन चिट्ठियों का अफसर जवाब देते हैं वह इस तरह से लिखी जाती हैं कि माननीय इन पत्रों को पढ़ ही नहीं पाते। सांसदों ने भी इस प्रकार की शिकायतें भारत सरकार के संयुक्त सचिव से की थीं। संयुक्त सचिव ने प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव जावेद उस्मानी को इस संबंध में पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि सभी अधिकारी सांसद और विधायकों के साथ सम्मान जनक व्यवहार करें। अगर वह किसी अफसर से मिलने या कोई शिकायत लेकर दफ्तर में आते हैं तो अधिकारी को चाहिए कि वह अपनी कुर्सी से खड़े हो जाएं। उनके जाते वक्त भी कुर्सी से उठकर सम्मान किया जाए। जो बड़े सरकारी आयोजन हों उनकी जानकारी जनप्रतिनिधियों को भी होनी चाहिए। जनप्रतिनिधि जिन कमेटियों के सदस्य होते हैं उनकी मीटिंग में भी उन्हें बुलाया जाए। समय से बुलावा भेजा जाए।