कोरोना को लेकर समाज के हर वर्ग में जहां भय व्याप्त है। वहीं बुजुर्ग अपनी सकारात्मक सोच और अनुशासित दिनचर्या से समाज को संदेश दे रहे हैं। सोमवार को रामगंगा विहार निवासी 93 वर्षीय बुजुर्ग महिला किरण शर्मा ने अपनी सकारात्मक सोच व हिम्मत के बल पर कोरोना को मात दी है। साथ ही उनके 58 वर्षीय बेटे सुनील शर्मा ने भी कोरोना से जंग जीत ली।
किरण मुरादाबाद में अब तक की सबसे उम्रदराज कोरोना संक्रमित हैं, जो सबसे कम दिनों में स्वस्थ होकर घर लौटी हैं। इससे पूर्व 82 वर्षीय शशि आठ दिन में कोरोना को मात देकर संक्रमितों को हार न मानने के लिए प्रेरित कर चुकी हैं। कोरोना को हराने में किरण को केवल 6 दिन लगे। जबकि उनके बेटे को स्वस्थ होने में 9 दिन लगे। दोनों को सोमवार दोपहर सवा 3 बजे रेलवे अस्पताल से छुट्टी दी गई। रेलवे अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक व उनकी टीम ने बुजुर्ग महिला को शॉल पहनाकर व पुष्प वर्षा कर सम्मान दिया। महिला व उनके बेटे को चिकित्सकों की टीम ने ससम्मान विदा किया। घर जाते हुए किरण ने सभी को आशीर्वाद व धन्यवाद दिया।
शहर की सबसे उम्रदराज कोरोना मरीज किरण शर्मा (93) के स्वस्थ हो जाने से अन्य मरीजों का आत्मविश्वास बढ़ा है। वहीं चिकित्सकों और अन्य स्टाफ में भी उत्साह है। कोरोना जहां युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक को अपना शिकार बना रहा है। समाज में इसे लेकर कई तरह की भ्रांतियां और भय व्याप्त है। ऐसे में किरण संक्रमितों और भयग्रस्त लोगों के लिए आशा की किरण से कम नहीं हैं।
उनके बेटे सुनील ने बताया कि 10 अगस्त से उन्हें बुखार की शिकायत थी। दवाइयां लेने के बाद भी जब बुखार ठीक नहीं हुआ तो निजी लैब से कोरोना की जांच कराई। 22 अगस्त को रिपोर्ट पाजिटिव आई और उन्हें रेलवे अस्पताल में भर्ती किया गया। इसके बाद परिजनों की भी जांच हुई। जिसमें उनकी मां व पत्नी पॉजिटिव पाए गए। उन्होंने बताया कि मां को टीएमयू के लिए रेफर किया गया था। लेकिन प्रार्थना करने पर प्रशासन ने बेटे सुनील के साथ ही किरण को भी रेलवे अस्पताल में भर्ती कराया। इतना ही नहीं मां-बेटे को एक दूसरे के बराबर में बेड उपलब्ध कराया।
सोमवार को अस्पताल से छुट्टी के वक्त उन्होंने सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जीने की इच्छा ही आपको बचाती है। यदि आपमें इच्छाशक्ति है किसी भी बीमारी को हराने की तो वो आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। उन्होंने कहा कि जो भी संक्रमित हो रहे हैं वो हिम्मत रखें और दिनचर्या को अनुशासित करें। जो इस संक्रमण से बचे हुए हैं वे सतर्क रहें। इस मौके पर सीएमएस डॉ. जगदीश चंद्र, डॉ. दिनेश मोहन, डॉ. राधाकांत पांडे, डॉ. हुमैरा, डॉ. सलमान, डॉ. अनिल सेठी, दीपक कुमार व बालादत्त शर्मा आदि स्टाफ मौजूद रहे।
93 वर्ष की उम्र में भी खुद करती हैं अपने काम
महिला के बेटे सुनील शर्मा ने बताया कि उनकी मां अपना अधिकांश काम स्वयं करती हैं। वह सुबह पांच बजे उठती हैं। इसके बाद घर के परिसर में ही कुछ देर टहलती हैं। स्नान आदि करने के बाद प्रतिदिन एक घंटे पूजापाठ में लीन रहती हैं। वह घर का बना सादा भोजन ही लेती हैं।
भर्ती होते वक्त हालत थी बेहद नाजुक
रेलवे अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्र ने बताया कि भर्ती करते वक्त किरण की हालत बेहद नाजुक थी। उनका आक्सीजन लेवल 90 आ गया था। साथ ही ब्लड प्रेशर भी अधिक था। उन्हें सांस लेने में लगातार तकलीफ हो रही थी। इसके बाद भी सभी को चौंकाते हुए उन्होंने जल्द ही खुद को बेहतर कर लिया। डॉ. जगदीश ने कहा कि उनके मामले को हमने चुनौती के रूप में लिया। किरण के स्वस्थ होने से पूरी टीम में उत्साहित है। उन्होंने कहा कि 44 बेड का कोविड सेंटर-1 अगस्त को शुरू किया गया था। यहां से अब तक 100 मरीज स्वस्थ होकर लौट चुके हैं। जबकि 21 का उपचार चल रहा है। उन्होंने कहा कि हर मरीज को पारिवारिक माहौल व बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना हमारा उद्देश्य है।
जिला प्रशासन ने भोजन का किया विशेष प्रबंध
सुनील शर्मा ने बताया कि उनकी मां रोटी-सब्जी आदि नहीं खा पाती हैं। इसकी सूचना जब उन्होंने अस्पताल स्टाफ को दी तो स्टाफ ने जिला प्रशासन को अवगत कराया। रेलवे अस्पताल के डॉ. राधाकांत पांडे ने बताया कि प्रशासन ने मरीज को बेहतर सुविधाएं देने में कोई कमी नहीं की। किरण के लिए दाल, दलिया व खिचड़ी आदि प्रशासन की ओर से आता था। वहीं किरण ने बताया कि रेलवे के मेडिकल स्टाफ ने खाने-पीने से लेकर नहाने तक का ध्यान रखा। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों ने परिवार की तरह ही उनकी देखभाल की। इसके लिए उन्होंने रेलवे मेडिकल स्टाफ जिला प्रशासन को धन्यवाद दिया है।