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वोट उसे मिलेगा जो जीएसटी से छुटकारा दिलवाए

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मुरादाबाद। लोकसभा चुनावों को लेकर आयोजित अमर उजाला फोकस ग्रुप में निर्यातकों ने एक स्वर से कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को यह अधिकार नहीं है कि वह टैक्स चुकाने वाले लोगों की रकम से सियासी फायदों के लिए खैरात बांटें। सियासी दलों और सरकारों को ऐसे वादे और योजनाएं लांच करने से पहले टैक्स देने वाले लोगों से रायशुमारी करनी चाहिए। निर्यातकों ने कहा कि सभी दलों ने मुरादाबाद की हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट इंडस्ट्री की उपेक्षा की है। निर्यातक वोट उसे देंगे जो हस्तशिल्प निर्यात को जीएसटी से मुक्त करने का वादा करेगा।
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मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के सचिव अवधेश अग्रवाल ने कहा कि निर्यातक उसे ही वोट देंगे जो ट्रेड को जीएसटी से मुक्त करेगा। उन्होंने कहा कि सहारनपुर का कालीन उद्योग आयकर मुक्त है तो मुरादाबाद का हस्तशिल्प क्यों नहीं। टेक्सटाइल्स की तरह मेटल हैंडीक्राफ्ट को छूट क्यों नहीं है। 7500 करोड़ रुपये सालाना का निर्यात करने के बावजूद मुरादाबाद में इंडस्ट्रियल एरिया नहीं है। शाह आलम ने कहा कि जीएसटी और नोटबंदी ने हस्तशिल्प निर्यात उद्योग की कमर तोड़ दी है। काजी शौकत ने कहा कि ड्रा बैक की पुरानी दरें फिर से बहाल की जाएं। विनय मंगला ने कहा कि एसईजेड को विकसित करने की जरूरत है। हेमंत जुनेजा ने इंडस्ट्रियल एरिया का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आज सभी फैक्ट्रियां ग्रीन लैंड में बनी हैं। इसकी वजह से सरकारी विभाग निर्यातकों का उत्पीड़न करते हैं। उन्हें एनओसी नहीं मिलती हैं। अंशुल अग्रवाल ने कहा कि जिस तरह टेक्सटाइल्स इंडस्ट्री में लेबर के लिए 3800 रुपये प्रति कारीगर सरकार देती है वैसे ही मुरादाबाद के हस्तशिल्प उद्योग को भी सरकार मदद करे। डा. हामिद ने प्रदूषण का मुद्दा उठाया। राजीव भंडूला ने कहा कि सबकुछ ऑनलाइन होने के बावजूद सरकारी अफसर निर्यातकाें को सुविधा शुल्क के लिए परेशान करते हैं। सरकार अफसरों के भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाए। रचित अग्रवाल ने सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने की मांग की। नवील अहमद ने कहा कि सिर्फ बातें करने से सुधार नहीं होगा, सरकार को हस्तशिल्प उद्योग के लिए कुछ ठोस कदम उठाने होंगे। शाहनवाज खान ने कहा कि यदि कोई चुना हुआ प्रतिनिधि ठीक से काम नहीं करे तो उसे रिकॉल करने का अधिकार जनता को मिलना चाहिए। उन्होंने ईरान मुद्दे पर निर्यातकों की मदद नहीं करने के लिए सभी को आड़े हाथाें लिया। माणिक जैन ने कहा कि जॉब क्रिएशन की बात हमेशा उठती है लेकिन सीधे रोजगार देने वाले उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकारें उदासीन रहती हैं। ब्यूरोक्रेसी के भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में सभी सियासी दल नाकाम हैं। सभी निर्यातकों ने एक स्वर में कहा कि सियासी दल वोट बटोरने के लिए लुभावनी योजनाओं को लागू करते हैं जिससे टैक्स देने वालों की रकम का दुरुपयोग होता है। इसे तुरंत रोका जाना चाहिए।
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