धनतेरस के शुभ अवसर पर रविवार को दिनभर बाजार गुलजार रहे। लोगों ने रविवार के अवकाश को खूब भुनाया। सुबह से लेकर देर रात तक दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ती रही। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए दुकानदारों ने तरह-तरह के आफर दिए। लक्ष्मी पूजन की तैयारियों से जुड़ी सामग्री से लेकर बर्तन, आभूषण, कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, किराना, आतिशबाजी, मिठाई-ड्राईफूड, फर्नीचर, सौंदर्य प्रसाधन और तमाम तरह के सजावटी सामानों की जमकर खरीदारी की गई।
इसमें काफी समय से ग्राहकों के इंतजार में मायूस बैठे दुकानदारों और व्यापारियों के चेहरे पर चमक दौड़ गई। उन्होंने भी ग्राहकों के स्वागत के लिए अपने प्रतिष्ठानों को आकर्षक तरीके से सजाया था। फूलों की खुशबू और रंग-बिरंगी झालरों की चमक मन में उत्साह भर रहे थे।
पांच दिवसीय दीपोत्सव सोमवार से शुरू हो रहा है। बाजार गंज से लेकर कोतवाली, चौमुखा, अमरोहा गेट, बर्तन बाजार, मंडी चौक, बुध बाजार, जीएमडी रोड, ताड़ीखाना, कोर्ट रोड पर सजावट, खील-बताशे, खिलौने और अस्थाई मूर्तियों की अस्थाई दुकानें सजाई गई थीं। लोगों की भीड़ भी सबसे ज्यादा इन्हीं दुकानों पर उमड़ी। दुकानदारों ने खील की 250 ग्राम के पैकेट में पैकिंग कर रखी थी। फुटकर में खिलौने भी 80 रुपये किलो बिके।
सजावट के लिए कौड़ी, मोती, सलीन के कपड़े और फूलों की वंदनवार पसंद की गईं। लक्ष्मी-गणेश और शुभ दीपावली के कंदील, प्लास्टिक, कपड़े में कई डिजाइन के कंदील लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। लक्ष्मी-गणेश के पूजन के लिए कमल गट्टे की मालाएं आई हैं। सजावट का सामान तीन सौ रुपये से दो हजार रुपये तक का झूमर में घंटी, हाथी, मोती, सुतली से बनीं चिड़िया, शंख, सीप, शीशा, घंटी, डमरू, ऊन आदि से बनी हुई हैं।
गत्ते की शुभ-दीपावली आकर्षक डिजाइन में है। सलीन के लक्ष्मी-गणेश के अलावा प्लास्टिक की रंगोली है। स्वास्तिक, ओउम, शुभ-लाभ लक्ष्मी जी के पैर वाले स्टीकर हैं। लक्ष्मी, गणेश, भगवान कुबेर, लक्ष्मी यंत्र, कुबेर यंत्र खरीद रहे हैं। प्लास्टिक फूलों के बंच, झालर, बंच, गमले पसंद किए जा रहे हैं। इसके अलावा बाजार चीनी झालरों से पटे हुए हैं। हालांकि स्वदेशी माल भी आया है, लेकिन वह चीनी की अपेक्षा महंगा है। दस से 15 मीटर की झालर लोग ज्यादा खरीद रहे हैं।
रविवार शाम इनकी कीमत में कुछ बढ़ोतरी भी हुई। 50 रुपये वाली झालर के 65 से 70 रुपये लिए गए। वहीं, ज्यादातर दुकानों पर पैकिंग की मिठाई लोगों को अपनी ओर आर्षित कर रही हैं। रसगुल्ला, सोहनपपड़ी प्रमुख हैं। इसके अलावा हलवाई की दुकानों पर दिनभर दूध उबाला जा रहा है, ताकि धनतेरस पर ग्राहकों को ताजी मिठाई मिल सके।
महाराष्ट्र से मंगवाए रंग
दीपोत्सव पर घरों और प्रतिष्ठानों में रंगोली बनाने का चलन बढ़ा है। इस बार रंगोली बनाने के रंग महाराष्ट्र, जयपुर, दिल्ली से मंगवाए गए हैं। इसके अलावा रंगोली के सांचे भी दुकानों पर मौजूद हैं। यह 40 रुपये से 120 रुपये तक के हैं।