दसवीं मुहर्रम को यौमे आशूरा पर इमाम हुसैन के चाहने वाले गम में डूबे रहे। हर ओर जिक्र-ए-शहादत होती रही। शहर की गलियों से लेकर मुख्य सड़क, नेशनल हाईवे, डबल फाटक पुल होते हुए कर्बला तक या हुसैन की सदाएं बुलंद होती रही । इस दौरान हर किसी की आंखें नम थीं और हर चेहरे पर इमाम हुसैन का गम था। इस माहौल में शुक्रवार को दसवीं मुहर्रम का जुलूस निकाला गया। ये सिलसिला फज्र के वक्त तक चलता रहा और गमगीन माहौल में ताजियाें को कर्बला में दफन किया गया।
शहर के गली मोहल्लों से निकले जुलूस में छोटे-बड़े तकरीबन 215 ताजिए शामिल हुए। इसमें कंबल का ताजिया, पंखे का ताजिया, सरसाें का ताजिया अहम रहे। जुलूस अकीदत और एहतराम के साथ कर्बला दससराय चौकी पहुंचा। जहां हुसैन के चाहने वालों ने नम आंखों से गमगीन माहौल में ताजियों को दफन किया । इस दौरान शहादतनामे और मर्सिए के दौर चलते रहे। जहां गमगीन माहौल में ताजियों को दफन किया गया। आखिर में शहर के ताजियों का सदर कंबल के ताजिए को दफन किया गया।
इस दौरान शहर में कई जगह जिक्र-ए-शहादत में दसवीं मुहर्रम की जानकारी दी गई। लोगों को बताया गया कि कर्बला में हजरत इमाम हुसैन की अजीम शहादत की यादगार आज दुनिया भर में मनाई जाती है। नवासे रसूल का रोजा इराक के कर्बला में है, लेकिन हर शहर में आज कर्बला मौजूद हैं। सच्चाई की जीत का पैगाम है यह अलम और ताजिए। आज हर कोई खुद को हक का परस्तार और हुसैनी बताता है। कर्बला की शहादत ने इस्लाम को नई रोशनी बख्शी, इसलिए शायरों ने कहा कि ‘इस्लाम जिंदा होता है हर कर्बला के बाद’।
हूरों की सलामी से उठा ताजियों का सरदार
मुरादाबाद। शुक्रवार को शाम सवा पांच बजे शहर के ताजियों का सरदार कंबल का ताजिया से दसवीं मुहर्रम के जुलूस का आगाज हुआ। इससे पहले पीरगैब मोहल्ले से निकली हूरों की जोड़ी ने कंबल के ताजिए को सलामी दी। शाम करीब सवा पांच बजे यहां के ताजिए को डीएम राकेश कुमार सिंह और एसएसपी जे. रविंदर गौड ने उठाकर अकीदतमंदों के कंधों पर रखा। इसी के साथ ही शहर में और सभी ताजियों के उठने का सिलसिला शुरू हो गया। इससे पहले मोहल्ला कंबल का ताजिया में शाम पांच बजते-बजते लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। हर व्यक्ति की नजर कंबल के ताजिए को निहार रही थी। लेकिन इंतजार हूरों की जोड़ी का था। ताकि सलामी के साथ ताजियों के सदर कंबल के ताजिए को उठाया जा सके। देर रात बाद में अकीदतमंद कंबल का ताजिया लेकर ईदगाह पहुंचे।
ताजिए के नीचे से निकलकर मांगी मन्नत
मुरादाबाद। बच्चों, जवान, महिलाओं और बुजुर्गों ने कंबल के ताजिए के उठने के साथ ही उनके नीचे से निकलकर मन्नत मांगी। इस दौरान जियारत के लिए होड़ सी मच गई। अधिकांश महिलाओं ने छताें से कंबल के ताजिए पर चावल, पैसा, कलावा आदि बरसा कर जियारत की।