माफियाओं ने रामगंगा किनारे मानकों को ताक पर रखकर मौत के कुएं बना दिए हैं। तीन फीट गहरे इन कुओं से हाईवे और पुल को खतरा हो सकता है। नदी में पानी आ जाने पर अब खनन हाईवे के किनारे किया जा रहा है। यहां से पुल भी निकट ही है। ऐसे में बाढ़ में नदी का पानी खनन वाले क्षेत्र में कटान कर सकता है। इसकेबावजूद अफसर इसको गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
शासन ने खनन के लिए मानक निर्धारित किए हैं। इंजीनियरों की रिपोर्ट के आधार पर ऐसे स्थानों पर सिल्ट और बालू का खनन किया जा सकता है, जहां पर वह अनावश्यक रूप से एकत्रित हो गई हो। उसके खनन से पर्यावरण मानकों को कोई नुकसान न होता हो। इसकेचलते ही खनन से पहले पर्यावरण की एनओसी लेना अनिवार्य होता है। आबादी के निकट, हाईवे और पुल के निकट खनन नहीं किया जा सकता है। ऐसे संवेदनशील स्थानों पर खनन के पट्टे नहीं मिलते हैं। खनन में जेसीबी और पोकलैन जैसी मशीनों का प्रयोग भी नहीं किया जा सकता है।
गुलाब बाड़ी के सामने हाईवे किनारे धड़ल्ले से खनन किया जा रहा है। पिछलें दिनों यह खनन रामगंगा में अंदर होता था। इससे शहर की ओर का हिस्सा नीचा पड़ गया। रामगंगा में पानी बढ़ने से निचले हिस्से की ओर पानी का बहाव तेज हुआ और शहर केसूरजनगर वाले क्षेत्र में पानी भर गया। अब खनन करने वालों ने हाईवे व पुल के निकट मशीन लगा दी हैं। इनसे दिन रात खनन किया जा रहा है। यदि रामगंगा में पानी बढ़ता है तो इस क्षेत्र में पानी टक्कर देगा। उससे सूरज नगर की आबादी में बड़ा कटान हो सकता है। इसके साथ ही कटान से हाईवे और पुल को भी नुकसान हो सकता है।
हमने रामगंगा किनारे कोई पट्टा नहीं दिया है। बाढ़ आई हुई है। ऐसे में पट्टा होने पर भी खनन नहीं किया जा सकता है। आबादी, हाईवे और पुल के निकट खनन नहीं होने दिया जाएगा। अभी तक मुझे इसकी जानकारी नहीं थी। जांच कराकर आरोपियों कार्रवाई की जाएगी।
- सनी कौशर, जिला खनन अधिकारी