मुरादाबाद। 90 वर्षीय श्यामवती ने मृत्यु के बाद भी समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया। उनका पार्थिव शरीर अब टीएमयू के एनाटॉमी विभाग में चिकित्सा छात्रों और डॉक्टरों के अध्ययन के लिए उपयोग किया जाएगा। वहीं, उनके नेत्रदान से किसी जरूरतमंद की जिंदगी में रोशनी पहुंचेगी।
दिल्ली रोड स्थित ग्लोबल एक्सपोर्ट परिसर में रहने वाली श्यामवती का निधन शुक्रवार दोपहर 3:20 बजे जिला अस्पताल में अस्थमा के चलते हुआ। वह अपने बेटे मून मिश्रा के साथ रहती थीं, जो फैक्टरी में केयरटेकर के रूप में कार्यरत हैं। परिवार के मुताबिक, वर्ष 2016 में श्यामवती को गंभीर अस्थमा अटैक आया था, जिसके बाद उन्हें टीएमयू में भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद वह स्वस्थ हो गईं, लेकिन इसी दौरान अखबार में प्रकाशित एक खबर ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उस समाचार से प्रेरित होकर उन्होंने देहदान और नेत्रदान का संकल्प लिया। उन्होंने तत्काल टीएमयू में जाकर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कीं और अपने निर्णय को परिवार की सहमति के साथ पंजीकृत कराया। करीब दस वर्ष पहले लिया गया यह संकल्प शुक्रवार को उनके निधन के साथ पूरा हो गया।
शुक्रवार शाम करीब सात बजे टीएमयू मेडिकल कॉलेज की टीम फैक्टरी परिसर पहुंची और श्यामवती के पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ अपने संरक्षण में लिया। इस दौरान टीम ने परिजनों का आभार जताया और उनके इस निर्णय को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया। टीम ने कहा कि श्यामवती का यह कदम न केवल चिकित्सा शिक्षा को नई दिशा देगा, बल्कि समाज में देहदान और नेत्रदान के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगा।