मुरादाबाद। नगर निगम की ठेका एजेंसियोें द्वारा सफाई कर्मचारियों की तनख्वाह बंदरबांट पर शासन की निगाह टेढ़ी हुई है। स्थानीय निकाय निदेशालय ने सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति के नाम पर होने वाली बंदरबांट की जानकारी तलब की है। अब निगम को बताना होगा कि एजेंसी कैसे नियुक्ति कर रही है। यह कैसे सुनिश्चित किया जाता है कि सफाई कर्मचारियों को तयशुदा वेतन मिलता है या नहीं। कितने कर्मचारी निगम के पास है। संकेत हैं कि बहुत जल्द एजेंसियों को दरकिनार करते हुए कर्मचारियों के खातों में सीधे वेतन भेजने की व्यवस्था लागू की जाएगी।
विवादों मेें आउटसोर्सिंग की नियुक्तियों के आने के बाद नगर आयुक्त संजय चौहान ने पूरी तरह से नये कर्मचारियों पर रोक लगा दी है। हाल में नाला सफाई के लिए डेढ़ महीने के लिए करीब 60 कर्मचारियों को आउटसोर्सिंग पर काफी पड़ताल के बाद रखा गया है। वहीं एजेंसियों के साथ लगे कर्मचारियों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। हाल में पोर्टल पर 4860 कर्मचारियों की जानकारी अपलोड करने की शुरुआत हुई, लेकिन 4200 कर्मचारियों की जानकारी अभी तक अपलोड नहीं की जा सकी है।
एजेंसियां इस तरह करती हैं गड़बड़ी :
- नगर निगम एजेंसियों का चयन करती है। यह एजेंसियां कागजों पर सरकार की तरफ से तय न्यूनतम वेतन देने का दावा करती हैं। लेकिन हकीकत में आधा या एक चौथाई ही सफाई कर्मचारियों तक पहुंचता है।
- निकाय के साथ जितने कर्मचारियों के काम पर लगाए जाने का करार होता है। एजेंसी उससे कम कर्मचारियों से काम चलाती है। बाकी कर्मचारियों का वेतन एजेंसियां हड़प कर जाती हैं।
- एजेंसियों के काम पर कोई मॉनीटरिंग सिस्टम निगम के पास नहीं है। एक बार काम पर कर्मचारियों के लगने के बाद निगम का एजेंसी के जरिये ही हस्तक्षेप होता है।
आउट सोर्सिंग पर कर्मचारियों की नियुक्तियों पर रोक लगा दी गई है। आउटसोर्सिंग पर नये कर्मचारी नहीं रखे जा रहे हैं। - संजय चौहान, नगर आयुक्त