खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग ने पानी का अवैध कारोबार करने वाले एक प्लांट में छापा मारकर उसे सील कर दिया। प्लांट में पानी के पाउच की पैकिंग करने के बाद शहर में बेचा जाता था। छापामारी टीम ने पानी के सैंपल लेकर प्लांट में तैयार 34200 पाउच भी जब्त किए हैं।
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी महेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि डबल फाटक स्थित संजय नगर में पानी के पैकिंग प्लांट संचालित होने की सूचना पर मंगलवार को छापा मारा। पैकिंग प्लांट सुदेश सैनी ने अपने घर में लगाया था। बोरिंग के पानी को आरओ से फिल्टर करने के बाद मशीनों से 250 एमएल के पाउच में पैक किया जाता था। पानी का पैक पाउच बाजार में दो रुपये का बेचा जाता था। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि शराब की दुकानों की कैंटीन एवं उसके आसपास लगने वाली ठेलियों में पानी के पाउच की सबसे अधिक सप्लाई होती थी। देहात इलाकों में शादी तथा अन्य समारोह के लिए पानी की सप्लाई दी जाती थी। प्लांट पिछले डेढ़ साल से संचालित हो रहा था। इसके बाद भी प्लांट का न तो एफएसएसएआई से लाइसेंस था और न ही बीआईएस से सर्टिफिकेट लिया गया था।
महेश त्रिपाठी के मुताबिक प्लांट पूरी तरह अवैध संचालित हो रहा था। पैकिंग से लेकर लेबलिंग भी मानकों के अनुरूप नहीं है। टीम ने प्लांट से पैकिंग पानी के नमूने लेकर तैयार माल 34200 पाउच जब्त कर लिया। पैकिंग करने वाली मशीनों को भी जब्त कर सील कर दिया। छापामार टीम में जिला अभिहित अधिकारी विनोद कुमार सिंह, खाद्य सुरक्षा अधिकारी बृजेश कुमार सिंह, वीरेश पाल मौजूद रहे।
दुकानदार कमाते हैं मोटा मुनाफा
पानी के अवैध कारोबार में अच्छी कमाई है। शहर में पानी पैकिंग करने के कई प्लांट संचालित हो रहे हैं। पैकिंग पानी का पाउच बेचकर दुकानदार चांदी काट रहे थे। जानकारों का कहना है कि प्लांट में पानी के एक पाउच की पैकिंग लागत करीब 20 से 25 पैसे आती है। प्लांट से दुकानदारों को 50 पैसे में इसकी सप्लाई दी जाती है। दुकानदार एक रुपये से लेकर दो रुपये तक मनमर्जी से इसे बेचते थे। देहात क्षेत्रों में शादी, समारोह आयोजन में इसकी खूब खपत होती थी।
चुनाव को लेकर अच्छे कारोबार की थी उम्मीद
पैकिंग वाले पानी के पाउच की चुनावी जनसभाओं और रैलियों में रिकार्ड खपत होती है। ऐसे कार्यक्रमों में लोगों की काफी भीड़ होती है। कार्यक्रम आयोजक भीड़ के लिए पैकिंग वाले पानी को प्राथमिकता देते हैं। सीधे प्लांट से खरीद करते हैं। जिससे लागत कम आती है और लोगों को पानी के पाउच वितरण करने में सुविधा होती है।