कंप्यूटर और मोबाइल का लंबे समय तक इस्तेमाल आंखों पर भारी पड़ रहा है। पलकें नहीं झपकने से आंखों में नमी की कमी होने से ड्राई आई सिंड्रोम की शिकायत बढ़ने लगी हैं। जिला अस्पताल के नेत्र विभाग की ओपीडी में पहुंचने वाला हर दूसरा व्यक्ति ड्राई आई सिंड्रोम से पीड़ित है। इनमें बच्चों से लेकर ही उम्र के लोग शामिल हैं।
जिला अस्पताल के नेत्र विभागाध्यक्ष डा. भावतोष शंखधार के मुताबिक सामान्य प्रक्रिया में हर पांच सेकेंड में आंख की पलके झपकती हैं। इससे आंखों की पुतली को नमी मिलती है। मोबाइल और कंप्यूटर के अत्यधिक इस्तेमाल से मिनटों तक आंखों की पलकें नहीं झपकती हैं। लंबे समय तक यही रूटीन रहने से आंखों में खुजली और भारीपन महसूस होने लगता है। चिकित्सकीय भाषा में इसे ड्राई आई सिंड्रोम कहते हैं। उनका कहना है कि जिला अस्पताल की नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में औसतन प्रतिदिन 250 से अधिक मरीज पहुंचते हैं। 60 फीसदी लोगाें में आई सिंड्रोम की शिकायत हो रही है।
डा. शंखधार के मुताबिक सामान्यतौर पर 40 साल की उम्र के बाद आंखों में चश्मे की जरूरत पड़ती है। इस उम्र के बाद नजदीक की नजर कमजोर पड़ने लगती है। लेकिन कंप्यूटर और मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल से 10 साल की उम्र के बच्चों में भी इस तरह की दिक्कतें आने लगी हैं। मोबाइल पर खेलने से बच्चों की दूर की नजर कमजोर हो रही है। इससे कई बच्चों में चश्मा लगाने की जरूरत पड़ रही है। चश्मे का नंबर भी लगातार बढ़ रहा है। डा. भावतोष बताते हैं, बच्चों को कंप्यूटर और मोबाइल का कम से कम इस्तेमाल करना चाहिए। आंखों में जलन और थकान की शिकायत होने पर डाक्टर की सलाह लेनी चाहिए। अपनी मर्जी से किसी भी तरह की दवा डालने से नुकसान हो सकता है।
बच्चाें को ज्यादा देर न देखने दें टीवी - मोबाइल
अपने बच्चों की आंखों की सलामती चाहते हैं तो उन्हें ज्यादा देर तक टीवी और मोबाइल न देखने दें। यह खतरनाक हो सकता है। कुछ बच्चे मोबाइल पर गेम खेलते रहते हैं या कंप्यूटर पर काम करते हैं। लगातार टीवी देखते रहते हैं। इसमें जल्दी पलकें नहीं झपकाते। टीवी और कंप्यूटर से निकलते वाली रोशनी भी आंखों के लिए हानिकारक होती है।
ड्राई आई सिंड्रोम के लक्षण
आंख का लाल होना और धुंधला महसूस होना। रोशनी और हवा में आंख खोलने में परेशानी होना। आंखों में खुजली और थकान महसूस होना।
फल और हरी सब्जियां खाएं
आंखों को रगड़ने से नुकसान हो सकता है। आंखों में नमी बनाए रखने के लिए अच्छे ब्रांडों की दवा का इस्तेमाल करें। फल एवं सब्जियां का अधिक इस्तेमाल करें।