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पीतल फैक्ट्रियों पर आमने-सामने आए दो विभाग

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मुरादाबाद। महानगर के आबादी वाले क्षेत्र में लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचाने वाली पीतल की भट्ठियों को मानकों को ताक पर रखकर बसाया गया। इससे सैकड़ों लोगों के बीमारी की चपेट में आने की आशंका बन गई है। उद्योग विभाग व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। डीएम ने इसको गंभीरता से लिया है।
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आवासीय क्षेत्रों में सामान्य उद्योग भी संचालित नहीं किए जा सकते। लेकिन नियमों को ताक पर रख सामान्य छोड़िए घातक श्रेणी के उद्योग शहर के बीच में चल रहे हैं। इनसे प्रदूषण धड़ल्ले से हो रहा है। यह मामला कई बार प्रशासन और उद्योग बंधु की बैठक में उठाया जा चुका है। आबादी से पीतल की भट्ठियों को बाहर करने का जिम्मा अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को सौंपा गया है। वहीं बोर्ड के अधिकारियों ने इससे हाथ खड़े कर दिए हैं। बोर्ड अफसरों का कहना है कि यह उद्योग विभाग की जिम्मेदारी है। उन्होंने ही भट्ठियों को लैंड यूज बदले बिना लाइसेंस जारी कर दिए हैं। बोर्ड अफसर पूरा मामला उद्योग विभाग पर डाल रहे हैं। इस खींचतान में महानगर में करीब 12 हजार पीतल की भट्ठियां धड़ल्ले से चल रही है। अब पूरा मामला डीएम के सामने पहुंच गया है।

हमने डीएम आफिस को रिपोर्ट भेज दी है। हमारे स्तर से फैक्ट्रियों को बंद कराया जाना संभव नहीं है। उद्योग विभाग ने बिना लैंड यूज बदले आवासीय क्षेत्र में लाइसेंस जारी कर दिए हैं। इनको हटवाने की जिम्मेदारी उन्हीं की है।
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- इ. आरके सिंह, आरओ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।

हमने किसी को लाइसेंस ही जारी नहीं किए हैं। इनको प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा एनओसी जारी की गई है। हमारे स्तर से इनको नहीं हटाया जाएगा। इनको बाहर करने की जिम्मेदारी बोर्ड अफसरों की है।
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- देश बंधु गौतम, डिप्टी डायरेक्टर उद्योग विभाग।
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