महाशिवरात्रि के त्योहार पर गंगाजल से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करने के लिए कांवड़ के बेड़े मुरादाबाद पहुंचने लगे हैं। दूसरे जिलों के कांवड़ियों के जत्थों से शनिवार को शहर शिवमय हो गया। कांठ रोड़ केसरिया रंग में रंग गया। शनिवार शाम को मौसम खराब होने के बावजूद उनका उत्साह कम नहीं कर पाया। पैरों में घुंघरू, तन पर केसरिया वस्त्र, होठों पर भोले के जयकारे और कंधे पर सजी हुईं कांवड़ भोले के भक्तों की श्रद्धा को बढ़ा रही थी। शहर के प्रमुख मंदिरों में भी महाशिवरात्रि के तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। मंदिर परिसर में बारिश से बचने के विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।
डीजे पर बजते शिव के गीतों से शहर गुंजायमान हो गया। कांवड़िए भी झूमते-गाते चल रहे थै। चार मार्च को यह कांवड़िए अपने-अपने यहां शिवालयों में जलाभिषेक करेंगे। कांवड़ियों के नंगे पैरों में कंकड़-पत्थर चुभ रहे हैं, लेकिन शिव की भक्ति से मिलने वाली शक्ति की वजह से वह यह दर्द भी हंसते-हंसते सहकर आगे बढ़ रहे हैं। सर्वाधिक श्रद्धालु खड़ेश्वरी कांवड़ लेकर आ रहे हैं, जिसे जमीन पर नहीं टेक सकते। इसलिए उनको आराम की व्यवस्था के लिए पंडाल सज गए हैं। यहां पर उनके भोजन के साथ उपचार के भी इंतजाम किए गए हैं। शनिवार को जो कांवड़िए गुजरे, उनमें अधिकांश रामपुर, चंदौसी, संभल, बरेली, पीलीभीत आदि के थे। एक दिन में 35 से 40 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए वह अपने गंतव्य को रवाना हुए। रामपुर के जयशंकर ने बताया कि वह अपनी पत्नी के साथ आठ वर्ष से कांवड़ लेकर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भोले की कृपा उनके परिवार पर है। 12 साल के सौरभ ने बताया कि उनके साथ 15 भोले के भक्तों का बेड़ा है। जब वह थक जाते हैं तो साथी उनकी कांवड़ लेते हैं। उन्होंने कहा कि मम्मी ने मना किया था, लेकिन सभी ने जब पूरी देखभाल करने का वादा किया तो उन्होंने भेज दिया।
प्राचीन शिव मंदिर झांझनपुर के महंत पंड़ित केदारनाथ मिश्र ने बताया कि परिसर की साफ-सफाई करवाई जा रही है। रविवार को कांवड़ियों के ठहरने के साथ भंडारे की व्यवस्था की गई है। चार मार्च को सुबह साढ़े चार बजे से कांवड़ चढ़ना शुरू हो जाएंगी। नौ बजे हवन होगा और फिर महाआरती और महाप्रसाद होगा। उन्होंने कहा कि सोमवार को दिन में चार बजकर दस मिनट तक त्रियोदशी तिथि है। इसके बाद चतुर्थदशी तिथि प्रारंभ होगी। इसलिए प्रदोष और निशीथ काल में चतुर्दशी तिथि मिलने के कारण महाशिवरात्रि का व्रत चार मार्च को होगा।
झारखंडी बाबा मंदिर के महंत भोलेनाथ योगीराज ने बताया कि बारिश से बचने के लिए हॉल और दो-तीन कमरों में कांवड़ियों के ठहरने की व्यवस्था की गई है। यदि कांवड़ियों की संख्या बढ़ेगी तो तिरपाल लगवाया जाएगा। सोमवार शाम को महाआरती की जाएगी। व्रत की खीर का वितरण होगा। शनिवार को नवग्रह मंदिर में श्रद्धालुओं ने दीपक जलाकर भगवान शनिदेव की आराधना की।