बिलारी। जिला कलैक्ट्रेट के 10 करोड़ रूपये से ज्यादा के ट्रेजरी घोटाले में तहसीलदार के हस्ताक्षरों की परीक्षण रिपोर्ट आने के बाद जो 22 अन्य बैंक खाताधारक आरोपी बने हैं उनमें अधिकतर बिलारी क्षेत्र के ही हैं। इस मामले के नामजद आरोपियों में भी मुख्य अभियुक्त अरूण भटनागर समेत अधिकतर बिलारी के ही निवासी हैं।
ट्रेजरी घोटाले के जरिए करोड़ों की धनराशि हड़पने वालों में अपने परिचितों और रिश्तेदारों के बैंक खातों में यह धनराशि खपाई थी। मुरादाबाद के थाना सिविल लाइन्स में दर्ज मुकदमे की विवेचना कर रहे दारोगा प्रेमपाल सिंह से जानकारी करने पर पता चला कि प्रयोगशाला की परीक्षण रिपोर्ट में तहसीलदार बिलारी के हस्ताक्षर फर्जी निकले हैं और यह परीक्षण रिपोर्ट आने के बाद 22 उन खाता धारकों को भी आरोपी बना दिया गया है जिनके बैंक खातों में ट्रेजरी घोटले की रकम खपाई गई थी। इस मामले में सबसे पहले लिखे गए मुकदमे में सात मुख्य नामजद आरोपियों अरूण भटनागर, शकुंतला भटनागर, ज्योति भटनागर, कांति देवी, अनिल मेहरोत्रा और हिमांशू सक्सेना आदि में से अधिकतर बिलारी क्षेत्र के निवासी हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान ऐसे 22 खाता धारक महेंद्र सिंह, प्रवीन सिंह, लखपत सिंह, भगवानदास, अनुज कुमार, सुधीर कुमार, विवेक कुमार, शिवऔतार सक्सेना, लाखन गिरी, श्यामेंद्र सक्सेना, अरविंद सक्सेना, हिमांशू सक्सेना, मोहम्मद अनस कादरी, लईक अहमद, शान मोहम्मद, लाखन गिरी, पवन कुमार, योगेश कुमार, विशाल यादव, विवेक कुमार, ओमित अग्रवाल, सुनील कुमार आदि सभी बिलारी क्षेत्र के रहने वाले हैं जबकि मोहम्मद इकबाल, सायरा बेगम, अतीक अहमद, नासिर अली और दीपक सिंह ठाकुरद्वारा क्षेत्र के रहने वाले हैं। उधर घोटाले के मुख्य अभियुक्त अरूण भटनागर के अभी तक पुलिस पकड़ में न आने और उसका मुख्य सहयोगी कहे जाने वाले अभियुक्त सोनू गिरी के कोतवाली बिलारी से फरार हो जाने के बाद अब पुलिस प्रशासन इन दोनों की गिरफ्तारी को लेकर और अधिक गंभीर हो गया है।