मुरादाबाद। एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) का मुरादाबाद मंडल के सभी जिलों में संकट खड़ा हो गया है। कुत्ते के काटने पर एआरवी लगवाने के लिए लोग भटक रहे हैं। मंडल के रामपुर, अमरोहा और बिजनौर से लोग मुरादाबाद जिला अस्पताल पहुंचने लगे हैं। वैक्सीन की खपत बढ़ने से जिला अस्पताल प्रशासन ने पहले आओ पहले लगाओ के फार्मूले पर वैकल्पिक व्यवस्था शुरू कर दी है। एक दिन में अधिकतम 50 इंजेक्शन जारी किए जा रहे हैं। 50 के बाद इमरजेंसी की स्थिति में इंजेक्शन जारी हो रहे हैं।
मुरादाबाद मंडल के सभी जिलों में आवारा और पागल कुत्तों का आतंक है। मंडल में एआरवी की सर्वाधिक खपत है। निजी अस्पतालों में एआरवी का एक इंजेक्शन 400 रुपये से महंगा है। कुत्ते के काटने पर पांच इंजेक्शन लगाए जाते हैं। सरकारी अस्पतालों में खपत की तुलना में सप्लाई नहीं है। जिससे अक्सर अस्पतालों में इसका संकट रहता है। पिछले एक सप्ताह से अमरोहा, रामपुर, बिजनौर से मरीज मुरादाबाद जिला अस्पताल पहुंचने लगे हैं। मुरादाबाद जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी वैक्सीन की मारामारी है। मुरादाबाद के देहात के अलावा बाहरी जिलों से मरीजों के पहुंचने से खपत बढ़ी है।
जिला अस्पताल में औसतन रोजाना 55 से 60 मरीज पहुंचते थे। लेकिन पिछले एक सप्ताह से ओपीडी में एआरवी लगवाने वालों की संख्या 100 से अधिक पहुंच रही है। अस्पताल प्रशासन ने पहले आओ पहले लगाओ का फार्मूला लागू कर दिया है। हालांकि, इसका लिखित आदेश जारी नहीं हुआ है। ओपीडी में रोजाना 50 इंजेक्शन दिए जा रहे हैं। 50 की खपत पूरी होने के बाद इंजेक्शन नहीं लगाए जा रहे हैं। इससे मरीजों को वापस लौटना पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अस्पताल पहुंचने वाले सभी मरीजों को इंजेक्शन लगाने पर जिला अस्पताल का कोटा भी खत्म हो जाएगा।
- अस्पताल में अधिकतर लोग कुत्ते की दहशत से आते हैं। करीब 60 फीसदी लोगों को घरेलू कुत्ता नाखून मार देता है। कई ऐसे लोग भी आते हैं जिन्हें हफ्ते भर पहले कुत्ते ने काटा होता है। जबकि एआरवी 24 घंटे के अंदर लगानी होती है। ऐेसे लोगों को इंजेक्शन नहीं लगाए जा रहे हैं।
- डा. शकील अहमद