सीमा पर बढ़ते तनाव से मुरादाबाद के हस्तशिल्प निर्यात उद्योग पर मंदी के बादल मंडराने लगे हैं। पुलवामा की आतंकी घटना का असर दिल्ली स्प्रिंग फेयर में देख चुके निर्यातकों को आशंका है कि मौजूदा हालात से निर्यात इंडस्ट्री अगले एक - दो साल के लिए मंदी की मांद में जा सकती है। इसके बावजूद निर्यातकों का एक स्वर से कहना है कि वह अपना नुकसान तो बर्दाश्त कर सकते हैं लेकिन आतंक के आका पाकिस्तान को जवाब देना जरूरी है।
मुरादाबाद से पाकिस्तान के सीधे कोई कारोबारी रिश्ते नहीं हैं लेकिन सीमा पर तनाव के चलते बाकी देशों को हो रहा निर्यात भी प्रभावित होगा। पुलवामा के आतंकी अटैक के बाद दिल्ली स्प्रिंग फेयर में विदेशी बायर्स की संख्या काफी घट गई थी। अब पाकिस्तान सीमा पर युद्ध जैसे हालात पैदा होने से मुरादाबाद के हस्तशिल्प उद्योग पर सीधा असर पड़ेगा। मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नवेद उर रहमान का कहना है कि मौजूदा हालात से निर्यात तेजी से गिरेगा। उन्हाेंने कहा कि युद्ध जैसे हालात पैदा होने से सबसे पहला असर निर्यात पर ही पड़ता है। विदेशी बायर्स भारत आने से बचेंगे और मुरादाबाद की हस्तशिल्प निर्यात इंडस्ट्री को मंदी झेलनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि पुलवामा की आतंकी घटना के बाद दिल्ली फेयर में विदेशी बायर्स काफी कम आए। उन्होंने कहा कि कारोबारी घाटे के बावजूद एक्सपोर्ट इंडस्ट्री अपनी सेना के जांबाजों के साथ खड़ी है। एसोसिएशन के पूर्व सचिव सतपाल का कहना है कि सीमा के हालात से निर्यात को कम से कम दो साल के लिए भयंकर मंदी में चला जाएगा लेकिन देश के स्वाभिमान के लिए यह कार्रवाई भी जरूरी थी। पाकिस्तान के लायलपुर (अब फैसलाबाद) में जन्मे सतपाल का 1947 में बंटवारे के समय हिंदुस्तान आए थे। उन्होंने कहा कि हालांकि युद्ध से कोई देश नहीं पनपा। इससे निर्यात तो तबाह होता ही है विकास भी रुकता है। लेकिन आतंक के आकाओं को सबक सिखाने के लिए की जा रही कार्रवाई में निर्यात इंडस्ट्री भी पूरे देश की तरह सेना के साथ खड़ी है।