उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के आह्वान पर एनएचएम कर्मियों का सोमवार से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू हो गया। संविदा कर्मियों ने मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय पर एकत्र होकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर धरना दिया। कार्य बहिष्कार से आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर बाकी सभी चिकित्सा सेवाओं पर असर पड़ा। मरीज
कर्मचारी संघ मुरादाबाद जिलाध्यक्ष अजीजुर रहीम और महामंत्री विपिन चंद्र भट्ट के नेतृत्व में मुरादाबाद और देहात के प्राथमिक एवं सामुदायिक चिकित्सालयों में तैनात संविदा कर्मी सुबह 11 बजे सीएमओ कार्यालय पहुंचे। कर्मचारियों ने लंबित मांगों के समर्थन में सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। जिलाध्यक्ष अजीजुर रहीम ने कहा कि चार सूत्रीय मांगों के समर्थन में कर्मचारी अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार पर रहेेंगे। पहले चरण में आपातकालीन सेवाओं को कार्य बहिष्कार में शामिल नहीं किया है। कर्मचारियों की सुनवाई नहीं तो आपातकालीन सेवाएं भी ठप करने का निर्णय लिया जाएगा।
जिला महामंत्री विपिन चंद्र भट्ट ने कहा कि सरकार की अनदेखी से संविदा कर्मियों का मानसिक और आर्थिक शोषण हो रहा है। मांगों के समर्थन में कई दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं। कर्मचारियों को मजबूरन कार्य बहिष्कार का रास्ता अपनाना पड़ा है। डॉ जगबीर सिंह ने कहा कि अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार कर कर्मचारी आरपार की लड़ाई लड़ेंगे। डा. मो जावेद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2025 तक भारत को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। सरकार टीबी कर्मचारियों की ही उपेक्षा कर रही है। कर्मचारियों को स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिल रहा है। टीबी कर्मचारी एनएचएम यूनियन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आंदोलन में शामिल होंगे। इस दौरान मनोज कुमार, गजेंद्र सिंह, डॉ वकील अहमद, डॉ अनीता मौर्या, विमल सिंह, संदीप बडोला, हेमंत चौधरी, निश्चल भटनागर, देवेंद्र नेगी, ज्ञान चंद्र समेत दर्जनों कर्मचारी मौजूद रहे।
आंदोलित कर्मियों की प्रमुख मांगें
- आशाओं का मानदेय दस हजार रुपये प्रतिमाह सुनिश्चित किया जाए
- आउटसोर्सिंग से नियुक्ति बंद की जाए
- कर्मचारियों को समान कार्य समान वेतन दिया जाए
- मानव संसाधन नीति लागू की जाए
डाक्टरों की हड़ताल से मरीज परेशान
सीएचसी एवं पीएचसी की ओपीडी सेवाएं ठप, जिला अस्पताल में उमड़ी भीड़
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। नेशनल हेल्थ मिशन के संविदा कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के पहले दिन सबसे अधिक असर प्राथमिक एवं सामुदायिक चिकित्सा केंद्रों पर पड़ा। सीएचसी और पीएचसी में चिकित्सा सेवाएं संविदा कर्मियों के भरोसे हैं। डाक्टरों और स्टाफ कर्मियों के कार्य बहिष्कार पर जाने से ओपीडी से लेकर पैथोलॉजी सेवाएं पूरी तरह बाधित रही। मरीजों को जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ी। जिला अस्पताल में जबर्दस्त भीड़ रही। पर्चा काउंटर से लेकर ओपीडी के बाहर मरीजों को घंटों लाइन में लगना पड़ा।
स्वास्थ्य सेवाओं में एनएचएम के 732 संविदा कर्मी तैनात हैं। इनमें 67 चिकित्सक शामिल हैं। इनके अलावा एएनएम, स्टाफ नर्स, फार्मेसिस्ट, सफाई कर्मी, चौकीदार, काउंसलर, टाडा इंट्री आपरेटर, प्रोग्राम मैनेजर, लैब टेक्नीशियन और आप्टोमैट्रिक कर्मी हैं। चिकित्सक सीएचसी और पीएचसी पर तैनात हैं। जबकि बाकी कर्मियों को जिला अस्पताल से लेकर, पीएचसी, सीएचसी और सीएमओ कार्यालय में तैनाती है। सोमवार को चिकित्सा कर्मी कार्य बहिष्कार कर सीधे सीएमओ कार्यालय पहुंच गए। इससे पीएचसी और सीएचसी सेंटर वीरान रहे। ओपीडी नहीं चलने से मरीजों को जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ी। जिला अस्पताल में ढाई हजार से अधिक ओपीडी पहुंच गई। पर्चा काउंटर, ओपीडी, औषधि वितरण केंद्र और पैथौलॉजी में जबर्दस्त भीड़ रही। बाल रोग विभाग की ओपीडी में भी काफी भीड़भाड़ रही। मरीजों को अस्पताल में घंटो इंतजार करना पड़ा। चिकित्सा अधीक्षक डा. राजेंद्र कुमार ने बताया कि संविदा कर्मियों की हड़ताल के चलते जिला अस्पताल में मरीजों का दबाव बढ़ा है। अस्पताल में चिकित्सा सेवाएं दुरुस्त रखने के निर्देश दिए हैं।
दोपहर बाद नहीं लगे एआरवी, लौटे मरीज
जिला अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन आयुष विभाग की ओपीडी में लगाए जाते हैं। ओपीडी के चिकित्सक संविदा में तैनात हैं। सोमवार को दोपहर 12 बजे तक ओपीडी खुली। 160 मरीज ओपीडी पहुंचे और 60 लोगों को एआरवी लगाई गई। 12 बजे बाद ओपीडी बंद कर डाक्टर धरने में शामिल हो गए। जिससे मरीजों को लौटना पड़ा।