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सीवर की समस् या से भी जूझेगा नगर निगम

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मुरादाबाद।
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महानगर केलोगों को पेयजल पाइपलाइन की तरह ही सीवर का दंश भी झेलना होगा। अभी सीवर डालते समय न तो नगर निगम ध्यान दे रहा है और न ही संबंधित क्षेत्रों के जनप्रतिनिधि। जिस चौड़ाई की सीवर लाइन डाली जा रही है, उससे होकर सीवर निकलना संभव ही नहीं है।
पीतल बस्ती क्षेत्र मेें पेयजल की जो भूमिगत लाइन लीकेज हुई है, वह मात्र तीन साल पहले डाली गई थी। जिस लाइन के पाइप 30 साल आराम से चलते और हैं और 60 साल तक खराब न होने की गारंटी होती है, वह मात्र दो साल में लीक होना किसी की समझ में नहंी आ रहा है। इससे स्पष्ट है कि पाइपों की गुणवत्ता अच्छी नहीं थी। आलम यह है कि महानगर में जो पाइपलाइन 20 साल पहले डाली गई थी, उसकी गुणवत्ता अच्छी है और जो चार-पांच साल में डाली गई हैं, उनकेपाइप फटने और लीकेज की रोजाना शिकायत आ रही हैं। ठेकेदार पाइप डालकर भुगतान लेकर निकल गए, अब इसको नगर निगम को झेलना पड़ रहा है।
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यही हाल सीवर लाइन का होने वाला है। महानगर की कालोनियों में सीवर लाइन मात्र एक फीट की डाली जा रही है। करीब एक हजार परिवारों का सीवर एक फीट की लाइन से निकला संभव नहीं है। जलकल विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार पांच सौ परिवारों का सीवर निकालने के लिए दो फीट चौड़ाई का पाइप होना अनिवार्य है। उससे कम चौड़ाई होने पर सीवर ओवरफ्लो होता है। जल निगम सीवर लाइन को डालकर नगर निगम को सौंप देगा। उससे बाद रोजाना की परेशानी नगर निगम को झेलनी होगी। जल निगम के सीवर प्रोजेक्ट अफसर महेंद्र कुमार का कहना है कि एक फीट चौड़ाई का सीवर पाइप काफी होता है। बहाव ठीक होगा तो ओवरफ्लो होने की समस्या नहीं आएगी।
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