मुरादाबाद। वित्तीय वर्ष समाप्त होने से एक दिन पहले शहर के लोगों ने 10 करोड़ रुपये आयकर जमा किया है। इसके साथ ही आयकर विभाग ने मुरादाबाद से 432 करोड़ रुपये आयकर वसूलने के लक्ष्य को काफी पीछे छोड़ दिया है। 30 मार्च की रात तक विभाग को मुरादाबाद से 450 करोड़ रुपये का आयकर मिल चुका था। महकमे को उम्मीद है कि 31 मार्च को वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन विभाग को 10-15 करोड़ रुपये और मिल सकते हैं।
आयकर विभाग के अधिकारी शुक्रवार को सुबह से ही दफ्तरों में डटे रहे। सुबह से लेकर देर रात तक फाइलों की पड़ताल होती रही। आयकर अधिकारियों का कहना है कि 30 मार्च को बड़ी संख्या में लोगों ने ऑनलाइन आयकर रिटर्न दाखिल किए हैं। कुल कितने रिटर्न दाखिल हुए हैं इसका आंकड़ा 31 मार्च के बाद ही सामने आएगा। विभागीय सूत्रों का कहना है कि शुक्रवार को करीब दस करोड़ रुपये आयकर जमा हुआ है। आयकर अधिकारी शनिवार को वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन इस आंकड़े को 460 करोड़ रुपये तक पहुंचाना चाहते हैं।
आयकर विभाग ने 100 पुरानी फाइलें खोलीं
मुरादाबाद। आयकर विभाग के अधिकारियों ने शुक्रवार को 100 पुरानी फाइलें खोली हैं। अफसरों का कहना है कि ऐसे लोगों की फाइलें खोली गई हैं जिन पर आयकर चोरी करने की आशंका है। आयकर विभाग इन लोगों को नोटिस जारी कर रहा है। वर्ष 2012- 13 तक की कुछ फाइलें खोल ली गई हैं। आयकर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नोटबंदी के पहले बंद हुए कुछ मामले फिर से खोले जाएंगे। इनकी विस्तृत जांच होगी।
कई नौकरशाह भी जांच के घेरे में
मुरादाबाद। मामूली पगार पाने वाले कई नौकरशाहों के शाही ठाठ भी आयकर विभाग की नजरों में चुभ रहे हैं। महकमे से कुछ ऐसे अधिकारियों की संपत्ति का ब्यौरा खंगालना शुरू किया है जिनकी संपत्ति उनकी आय से कई गुना तक उजागर हो रही है। ऐसे अधिकारियों के परिवार और रिश्तेदारों के साथ ही नौकरों तक के नाम पर संपत्तियां उजागर हो रही हैं। मुरादाबाद में मौजूदा समय में तैनात और यहां पूर्व में तैनात रहे कई अफसर जांच के घेरे में हैं। सरकारी कुर्सियों पर बैठे कुछ बाबू भी जांच के दायरे में हैं। जिन्होंने मामूली पगार में करोड़ों रुपये की संपत्ति खड़ी कर दी है।
अफसरों की बेनामी संपत्ति भी खंगालेगा आयकर विभाग
मुरादाबाद। आयकर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बेनामी संपत्ति के कमोबेश सभी मामले अफसरों से जुड़े हैं। भ्रष्टाचार से अकूत दौलत जुटाने वाले कुछ अधिकारियों ने ऐसे नामों पर संपत्ति खरीदी है जिनका कहीं कोई अतापता ही नहीं है। आयकर विभाग गोपनीय तरीके से इसकी जांच में जुटा है।