संघ की रसीदों की आड़ में ‘सत्ता टैक्स’
क्रासर
- ‘पीड़ित सहायता निधि’ की रसीदों के नाम पर करोड़ों रुपये वसूले
- एक - एक नेता बता रहा अपने को 20- 20 लाख चंदा इकट्ठा करने का टारगेट
- 50 हजार से 2.5 लाख रुपये तक एक - एक व्यापारी से वसूले जा रहे
उमेश शर्मा
मुरादाबाद।
केरल और उड़ीसा में हिंदुओं को धर्म परिवर्तन से रोकने के बहाने भाजपाई चंदा वसूली के मिशन पर लगाए गए हैं। इसके लिए कथित तौर पर आरएसएस से जारी की गई रसीदों को चंदा वसूली के लाइसेंस के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। चंदा देने वाले इसे ‘सत्ता टैक्स’ के रूप में चुका रहे हैं तो वसूलने वाले भाजपाई भी अपना हक समझकर रकम बटोर रहे हैं। वसूली करने वालों में भाजपा के सांसद और विधायक ही नहीं एमएलसी और कुछ मंत्री भी हैं। वसूली आरएसएस रसीदों पर हो रही है लिहाजा दांव पर भगवा खेमे की साख है। अहत बात ये है कि कथित तौर पर आरएसएस की ओर से जारी इन रसीदों पर महज एक हजार रुपये अंकित हैं, जबकि वसूली न्यूनतम 50 हजार रुपये से लेकर 2.5 लाख रुपये तक हो रही है।
भाजपा के कुछ जनप्रतिनिधियों और संगठन के अहम ओहदेदारों ने चंदा वसूली के लिए बाकायदा अलग - अलग लिस्टें बनाई हैं। वसूली के लिए न्यूनतम लक्ष्य 50 हजार रुपये प्रति व्यापारी रखा गया है। लिस्टों में व्यापारियों, कारोबारियों, मेडिकल स्टोर संचालकों, ट्रांसपोर्टरों, निर्यातकों, डाक्टरों, होटल, रेस्टोरेंट संचालकों, शराब का काम करने वालों को कैटेगिरी के हिसाब से लिस्टों में जगह दी गई है। इसी के मुताबिक इनसे वसूली की जा रही है। भाजपा नेता यह कहकर वसूली कर रहे हैं कि उन्हें आरएसएस ने चंदा वसूली के टारगेट दिए हैं। बताया जाता है कि इस रकम से केरल और उड़ीसा में धर्म परिवर्तन की आंधी को रोका जाएगा ताकि आर्थिक मदद मिलने पर हिंदू धर्म न बदलें।
पार्टी के भरोसेमंद सूत्रों ने इसकी पुष्टि भी की है। पार्टी के सूत्रों का कहना है कि सभी सांसदों, विधायकों, एमएलसी और मंत्रियों को चंदा वसूली के लक्ष्य दिए गए हैं। लेकिन ये लक्ष्य इतने बड़े नहीं हैं, जितनी वसूली की जा रही है। भाजपा के एक अहम ओहदेदार ने आरएसएस की रसीद मुहै़य्या कराते हुए बताया कि प्रति व्यक्ति केवल एक हजार रुपये स्वेच्छा से लेने के निर्देश दिए गए थे। सांसदों को अपने लोकसभा क्षेत्र से ढाई - ढाई लाख और विधायकों को एक - एक लाख रुपये की रसीदें टोटल बेचने का लक्ष्य था। मंत्रियों को पांच लाख रुपये और एमएलसी को एक लाख रुपये का टारगेट मिला था। लेकिन इन रसीदों के बहाने कुछ भाजपाई धुरंधरों ने चंदे को ‘सत्ता टैक्स’ बना डाला। शहर भर के व्यापारियों, डाक्टरों, केमिस्ट, होटल - रेस्टोरेंट संचालकों, निर्यातकों आदि की लिस्ट बनाई और किसी से 50 हजार तो किसी से एक लाख तो किसी से 2.5 लाख की वसूली शुरू कर दी। टारगेट महज एक लाख, ढाई लाख और पांच लाख का था जबकि इसकी आड़ में भाजपा के ये धुरंधर करोड़ों रुपये बाजार से बटोर चुके हैं।
किस - किस को दें ‘सत्ता टैक्स’
मुरादाबाद। व्यापारियों के सामने दिक्कत ये है कि वो आखिर किस - किस को चंदा दें। अकेले मुरादाबाद की ही बात करें तो चार धड़े अलग - अलग चंदा वसूली कर रहे हैं। बाजार में कुछ दुकानदारों के साथ ही कुछ डाक्टरों ने बताया कि उनके पास तीन - तीन लोग चंदा लेने आ चुके हैं। किसी को भी पचास हजार से कम चंदा नहीं चाहिए। डिमांड ढाई लाख रुपये तक है। हरेक नेता आकर यही कहता है कि उसे संघ की ओर से बीस लाख रुपये चंदा वसूलने का लक्ष्य मिला है। चंदा चंदे की तरह नहीं बल्कि ‘सत्ता टैक्स’ के रूप में पूरी हनक में मांगा जा रहा है। देने वालों की भी मजबूरी है। प्रदेश से लेकर केंद्र तक भाजपा की सरकार है। ऐसे में भाजपा के अहम ओहदेदार चंदा मांगने पहुंचें तो भला इंकार कैसे करें। लेकिन व्यापारियों के सामने दिक्कत है, इनमें से अधिकांश के नाम तो चंदा वसूलने वाले चारों भाजपाई धड़ों की लिस्ट में शामिल हैं। इनकी टीस ये भी है कि इन्होंने खुद भी भाजपा को वोट देकर सत्ता तक पहुंचाया और आज उन्हीं से सत्ता टैक्स वसूला जा रहा है।
संघ को बदनाम कर रहे वसूली करने वाले
मुरादाबाद। भाजपा नेताओं द्वारा संघ की रसीदों के नाम पर ‘सत्ता टैक्स’ वसूलने के मामले में संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी का कहना है कि जो लोग खुद को टारगेट मिलने की बात कहकर वसूली कर रहे हैं वह पूरी तरह से गलत है। ऐसा करके लोग संघ को बदनाम करने का काम कर रहे हैं। संघ ने ऐसे कोई टारगेट भाजपा या किसी संगठन को नहीं दिए हैं, यह संघ की कार्य संस्कृति में ही नहीं है। संघ नेता ने कहा कि केरल में माओवादियों और कम्युनिस्टों द्वारा वहां के सीएम के संरक्षण में हिंदुओं की हत्याएं की जा रही हैं, उनके परिवारों की मदद के लिए संघ पदाधिकारी खुद लोगाें से चंदा इकट्ठा कर रहे हैं। लेकिन यह चंदा प्रति व्यक्ति केवल 1000 रुपये है वो भी केवल उन्हीं से जो स्वेच्छा से देना चाहें। इसकी रसीद भी लोगों को दी जा रही है।
केजरीवाल स्टाइल में चंदे के लिए डिनर पार्टी
मुरादाबाद। चंदा इकट्ठा करने के लिए मंडल में कुछ भाजपा नेताओं ने दिल्ली के सीएम केजरीवाल के स्टाइल में डिनर पार्टी का फंडा अपनाया है। जिनसे चंदा लेना है उन्हें डिनर पार्टियों में बुलाया जा रहा है। इस पार्टी में शामिल होने की तय फीस है। जिसे चंदे के रूप में लिया जा रहा है। इस तरह की डिनर पार्टियों में व्यापारी, ट्रांसपोर्टर, डाक्टर, होटल व रेस्टोरेंट संचालक, शराब व्यापारी, ठेकेदार, प्रापर्टी डीलरों आदि को आमंत्रित किया जाता है। मुरादाबाद मंडल में भी ऐसी दो डिनर पार्टी हो चुकी हैं।
संघ की ओर से ऐसा कोई चंदा एकत्र किए जाने का निर्देश नहीं है। चंदा इकट्ठा किए जाने के बारे में मुझे कोई सूचना भी नहीं है। मुझे नहीं पता कि कौन कहां चंदा इकट्ठा कर रहा है। पार्टी की ओर से ऐसा कोई निर्देश नहीं आया है।
- हरिओम शर्मा, जिलाध्यक्ष, भाजपा।