मीजल्स रुबेला (एमआर) टीकाकरण अभियान में मुरादाबाद जिला लगातार पिछड़ रहा है। स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग के संयुुक्त जन जागरूकता अभियान के बाद भी अभिभावक बच्चों को टीका लगवाने से कतरा रहे हैं। अभिभावकों की बेरुखी से मुरादाबाद प्रदेश में टीकाकरण की दौड़ में सबसे फिसड्डी जिलों में शामिल हो गया है। स्वास्थ्य विभाग से जारी आंकड़ों के मुताबिक मुरादाबाद जिला एमआर टीकाकरण में उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में 68वें स्थान पर है। टीकाकरण की रफ्तार कम होने के साथ स्वास्थ्य विभाग की मुश्किलें भी बढ़ रही हैं।
26 नवंबर से एमआर टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। मुरादाबाद जिले में 1196345 बच्चों का टीकाकरण का लक्ष्य है। जिले में 66.76 फीसदी टीकाकरण कराने में स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग के पसीने छूट गए हैं। टीकाकरण के लिए ग्रामीण क्षेत्र को आठ और शहर को सात जोन में बांटा गया है। स्कूलों और मदरसों से टीकाकरण की शुरुआत की गई है। अभिभावकों के टीकाकरण कराने से इंकार करने पर जागरूकता टीमें बनाई गई हैं। जिले में 150 स्कूलों और मदरसों में टीकाकरण औसत काफी कम है। ऐसे स्कूलों और मदरसों को चिह्नित कर शिक्षा विभाग को सूची सौंपी गई है। इनमें भी अधिकतर स्कूल मुस्लिम इलाकों के हैं। विभाग टीमों स्कूल प्रबंधकों और अभिभावकों की काउंसलिंग कर रही हैं। इसके बाद भी टीकाकरण की रफ्तार नहीं बढ़ पा रही है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक मुरादाबाद जिले में 66.76 फीसदी टीकाकरण हुआ है। जबकि प्रदेश का औसत टीकाकरण 79.04 फीसदी हो चुका है। प्रदेश में गोरखपुर जिले में 100 फीसदी टीकाकरण के साथ लक्ष्य पूरा हो चुका है। प्रदेश के 75 जिलों में मुरादाबाद की स्थिति 68वें स्थान पर है। जबकि प्रदेश में सबसे कम टीकाकरण प्रयागराज में 31.80 फीसदी हुआ है।
- टीकाकरण अभियान में मुश्किलें आने लगी हैं। अधिकतर वहीं बच्चे टीकाकरण से रह गए हैं जिनके अभिभावक शुरुआत से ही विरोध कर रहे थे। अभिभावकों की काउंसलिंग की जा चुक है। इसके बाद भी कई अभिभावकों ने टीका लगवाने से साफ इंकार कर दिया है। - डा. दीपक वर्मा, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी