बघौली में कोयला लदी मालगाड़ी के डिब्बे एक्सल टूटने की वजह से पटरी से उतरने थे। गेटमैन ने हॉट एक्सल देखकर इसकी जानकारी स्टेशन मास्टर को दी थी, लेकिन मालगाड़ी स्टेशन पर पहुंचने से पहले ही हादसा ग्रस्त हो गई थी। दुर्घटनास्थल पर एक्सल के टुकड़े मिले हैं। जबकि गेटमैन के बयान भी दर्ज किए गए हैं। हालांकि अभी इस पूरे प्रकरण की जांच उत्तर रेलवे मुख्यालय की टीम करेगी। आधिकारिक पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।
मुरादाबाद रेल मंडल के बघौली और बालामऊ के बीच शनिवार साढ़े चार बजे कोयला लदी मालगाड़ी की 17 बोगियां बेपटरी हो र्गईं थीं। जिससे लखनऊ दिल्ली रेल मार्ग पर अप और डाउन ट्रेनों का संचालन ठप हो गया। रेल संचालन शुरू करने में 42 घंटे का लंबा समय समय लग गया। उत्तर रेलवे मुख्यालय की ओर से जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की है। टीम दुर्घटनास्थल पर जाकर जांच करेगी। इसके अलावा संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान भी दर्ज करेगी। इसके बाद रिपोर्ट तैयार होगी। हालांकि प्राथमिकी जांच में सामने आया कि एक्सल टूटने की वजह से मालगाड़ी के डिब्बे पटरी से उतरे थे। बघौली और बालामऊ के स्थित गेट से जब मालगाड़ी निकली थी तो एक्सल गर्म हो रहा था। जिससे चिंगारी निकल रही थी। गेटमैन ने इसकी जानकारी रेलवे कंट्रोल रूम और नजदीकी स्टेशन मास्टर को दी थी। जिसे लेकर रेलवे स्टाफ अलर्ट हो गया था। लेकिन उससे पहले ही एक्सल गर्म होने के कारण पिघल कर टूट गया। जिससे डिब्बे पटरी से उतर गए थे। डीआरएम अजय कुमार सिंघल ने बताया कि इस मामले में मुख्यालय से जांच के लिए टीम गठित की गई है।
धीमी गति से गुजारी जा रहीं ट्रेनें
मुरादाबाद। बघौली हादसे के बाद 42 घंटे बाद लखनऊ दिल्ली रेल मार्ग बहाल हो पाया था। इसके बाद भी यहां से ट्रेनों को धीमी गति से गुजारा जा रहा है। ट्रैक के आस पास की अभी कोयला पड़ा हुआ है। जिसे हटाने में सेना लगी है। जिसकी वजह से ट्रेनें विलंब से चल रही हैं।
कोहरे से थमे ट्रेनें के पहिये, कई ट्रेनें रद्द
मुरादाबाद। कोहरे की वजह से ट्रेनें लेट चल रही हैं। जिससे यात्रियों को खासी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। मंगलवार को जनता एक्सप्रेस, परक्का एक्सप्रेस, हिमगिरी एक्सप्रेस, श्रमजीवी एक्सप्रेस, न्यू जलपाईगुड़ी एक्सप्रेस, डबल डेकर एक्सप्रेस, हमसफर, सियालदह एक्सप्रेस, शहीद एक्सप्रेस, जनसेवा, और गरीब रथ और राज्यरानी एक्सप्रेस रद्द रहीं। इसके अलावा जो ट्रेनें चली। वह भी घंटों देरी से आई।