अंग्रेजी माध्यम के झांझनपुर प्राथमिक विद्यालय में चार दिन बाद बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन खाने लायक नहीं था। भोजन पहुंचने से उत्साहित बच्चों ने जैसे ही तहरी देखी, खाने से मना कर दिया। मोटे चावल से बनाई तहरी बासी थी। हल्दी के सिवाय आलू के कुछ टुकड़ों के अलावा दूसरी कोई सब्जी नहीं थी। प्रधानाध्यापिका का आरोप है कि मिड-डे मील में परोसे जाने वाले खाने की गुणवत्ता खराब होती है। सूखी रोटियां और मोटे चावल की तहरी बांटी जाती है। 75 फीसदी बच्चे मिड डे मील का खाना नहीं खाते और घरों से लंच बाक्स लेकर आते हैं। शुक्रवार को करीब 80 फीसदी बच्चों ने तहरी देखकर ही खाने से मना कर दिया।
झांझनपुर प्राथमिक विद्यालय में 172 बच्चे पंजीकृत हैं। प्रधानाध्यापिका रजनी बाला के मुताबिक स्कूल में प्रतिदिन औसतन 35 से 40 बच्चे ही मध्याह्न भोजन खाते हैं। प्रधानाध्यापिका का आरोप है कि रोटियां दांतों से नहीं टूटती हैं। रोटियां पूड़ी से बड़ी नहीं होती हैं। दाल में दाने ढूंढने पड़ते हैं। दाल के नाम पर गर्म पानी में हल्दी और नमक मिलाकर परोसा जाता है। तहरी वाले दिन बच्चे नाक मुंह सिकोड़ते हैं। चावल इतना मोटा और ठंडा होता है बच्चों के गले से नीचे नहीं उतरता है। इतना ही नहीं स्कूलों में लंच दोपहर 12 बजे होता है लेकिन एनजीओ नौ बजे ही स्कूलों में खाना पहुंचा देती है। तीन घंटे पहले भेजा गया खाना ठंडा हो जाता है। इस वजह से बच्चे इस खाने को खाने से मना कर देते हैं।
अभिभावकों ने अपने बच्चों से स्कूल का खाना खाने से मना किया है। मिड डे मील खाने वाले 25 फीसदी बच्चे गरीब परिवारों से हैं। उन्हें भी चार दिनों से मिड डे मील का खाना नसीब नहीं हुआ। एनजीओ ने भोजन की सप्लाई रोक दी। खंड शिक्षा अधिकारी को लिखित शिकायत करने पर स्कूल में खाना पहुंचाया गया। तहरी देखकर ही कई बच्चों ने खाने से मना कर दिया।
झांझनपुर स्कूल में एमडीएम वितरण नहीं करने की शिकायत मिली थी। खाने का वितरण शुरू करवा दिया है। स्कूल को जोड़ने वाली सड़क पर पुलिया निर्माण होने से खाने का वितरण नहीं हो पाया। खाने की गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी। - अखिलेश, जिला समन्वयक, एमडीएम