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‘करोड़ों फूंककर खंडहर होने को क्यों छोड़ा एमडीए आफिस’

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मुरादाबाद।
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पिछले सप्ताह एमडीए आफिस का औचक निरीक्षण कर खलबली मचाने के बाद मंडलायुक्त अनिल राजकुमार ने अब निरीक्षण आख्या में कई बिंदुओं पर प्राधिकरण अफसरों का जवाब तलब किया है। कमिश्नर ने पूछा है कि बिना कोई प्लानिंग किए एमडीए का नया कार्यालय बनाने में पब्लिक की कमाई के करोड़ों रुपये क्यों फूंके गए। यदि नया दफ्तर बनाया गया तो बनने के एक दशक बाद भी उसे खंडहर होने के लिए क्यों छोड़ रखा है। कमिश्नर ने ऐसे ही कई मुद्दों पर इसी सप्ताह बोर्ड बैठक बुलाने के निर्देश दिए हैं। नया मुरादाबाद में करोड़ों रुपये की लागत से बने नए आफिस और आवासीय कालोनी का मुद्दा शासन को रेफर किया जाएगा।
मंडलायुक्त अनिल राजकुमार ने शुक्रवार को अचानक एमडीए आफिस पर छापा मारकर प्राधिकरण की एक - एक संकाय को चेक किया था। उन्हाेंने कई मुद्दों पर नाराजगी जाहिर की थी। कमिश्नर की ओर से निरीक्षण में मिली खामियों पर एक रिपोर्ट एमडीए को भेजकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। इनमें नया मुरादाबाद में बना एमडीए के नए आफिस का मुद्दा मुख्य है। कमिश्नर ने एमडीए अफसरों से पूछा है कि यदि शिफ्ट नहीं करना था तो बगैर सोचे - समझे पब्लिक की कमाई के करोड़ों रुपये आफिस बनाने में क्यों फूंक दिए गए। नया मुरादाबाद में ही प्राधिकरण अफसरों और कर्मचारियों के लिए आवास भी बना दिए गए। दोनों का निर्माण हुए करीब 10 वर्ष बीत गए हैं, लेकिन न तो एमडीए आफिस कांठ रोड से यहां शिफ्ट हो सका है और न ही अफसरों व कर्मचारियों के आवास। कमिश्नर ने पूछा है कि पब्लिक की रकम की इस कदर बेदर्दी से बर्बादी क्यों की गई। एमडीए का नया आफिस रख रखाव नहीं होने की वजह से खंडहर बनता जा रहा है। एमडीए नए कार्यालय को बेचने का फैसला कर चुका है। लेकिन इसे बेचने के लिए भी कोई प्रक्रिया अभी शुरू नहीं की गई है। कमिश्नर ने यह भी पूछा है कि अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए नया मुरादाबाद में बनाए गए आवासों का प्राधिकरण क्या कर रहा है। इन्हें बनाकर खंडहर होने के लिए क्यों छोड़ दिया गया है।
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प्राधिकरण ने वर्षों पूर्व करोड़ों रुपये लगाकर नया मुरादाबाद में एमडीए के लिए नया आफिस और अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए आवास बनाए। एमडीए ने न तो आफिस शिफ्ट किया है और न ही आवासों में कोई पहुंचा है। आफिस और आवास खंडहर होते जा रहे हैं। पब्लिक के पैसे की बर्बादी पर अफसरों से जवाब मांगा गया है। पूरे प्रकरण को शासन को भी रेफर किया जाएगा। - अनिल राजकुमार, मंडलायुक्त।
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