बारिश से सूबे के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार महानगर की हवा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। वायु में मौजूद सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाले एसपीएम (सालिड पार्टिकल मेटर) में भारी कमी आ गई है। इससे आंखों में जलन होना बंद हो गया है और सांस लेने में सुखद अनुभव हो रहा है।
महानगर प्रदेश केसबसे प्रदूषित शहरों में शामिल है। ज्यादा प्रदूषण वाले 15 शहरों की सूची में मुरादाबाद का पांचवां नंबर है। यहां पर सबसे ज्यादा प्रदूषण एसपीएम और हानिकारक गैसों का है। प्रदूषण से शहर की हवा से आंखों में जलन होने, त्वचा पर एलर्जी होने और चेहरे-बालों में रूखापन होता था। सांस की नली में एलर्जी के मामले भी लगातार सामने आ रहे थे। हालत यह थी कि शहर की हवा में एसपीएम की मात्रा 50 मानक के सापेक्ष 350 रिकार्ड की गई थी। हवा में कार्बन, माइक्रो रबर और लेड की मात्रा भी मानकों से कई गुना पाई जा रही थी।
बरसात के मौसम ने शहर के वातावरण को स्वच्छ बना दिया है। लगातार बारिश के चलते एसपीएम, कार्बन और हानिकारक गैसों के पार्टिकल की मात्रा में एकाएक भारी गिरावट आई है। बरसात होने और हवा में नमी बनी रहने से हानिकारक कण भारी होकर जमीन पर बैठ जाते हैं। इससे लोगों की आंख, त्वचा और श्वसन क्रिया में इनसे परेशानी नहीं हो रही है। अब शहर के लोगों की आंखों में जलन होना बंद हो गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों के अनुसार एसपीएम की मात्रा 70-80 कण प्रति घन मीटर चल रही है। यह बहुत सुखद स्थिति है।
हवा में बारिश और नमी होने से भारी कण नीचे बैठ जाते हैं। इससे धूल व धुआं के कण हवा में उड़ने की बजाय जमीन पर बैठ जाते हैं। ऐसे में आंखों के जलन होने, सांस लेने में परेशानी होने और एलर्जी की समस्या कम हो गई है।
- बीके राजपूत, पर्यावरण वैज्ञानिक-प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।