मुरादाबाद। पालीथीन कैंसर जैसे भयावह-जानलेवा रोगों का कारण बनी हुई है। इसका असर सामान्य तापमान में ही खाद्य पदार्थों में घुलना शुरू हो जाता है। खाद्य सामान की पैकिंग और स्वच्छ मानी जाने वाली प्लास्टिक क्राकरी जानलेवा रोगों का कारण बन रही है।
महानगर में रोजाना 20 मीट्रिक टन पालीथीन निकलती है। हालांकि आकार में यह कुल निकलने वाले 400 मीट्रिक टन कूड़े के 30 फीसदी के बराबर होती है। विशेषज्ञों के अनुसार पालीथीन में खाद्य सामान रखने से वह जहरीला हो जाता है। इससे रक्त में थैलेट्स नामक बीमारी होने लगती है। इससे गर्भस्थ शिशु केरोगी होने की आशंका बढ़ जाती है। प्लास्टिक में रखा सामान खाने से उच्च रक्तचाप, अस्थमा, कैंसर, कुष्ठ रोग आदि हो जाते हैं।
पर्यावरण वैज्ञानिक बीएस राजपूत केअनुसार पालीथीन को गलने में 200 साल का वक्त लगता है। इस दौरान पालीथीन में से हाइड्रोक्लोरिक एसिड और सल्फर डाई आक्साइड घुलता रहता है। इसको जलाने पर कार्बनडाईआक्साइड उत्पन्न होती है। पालीथीन का पाली विनाइल क्लोराइड और एक्रीलीन का उत्पादन हो रहा है।