शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के अंतर्गत निजी स्कूलों में बच्चों के दाखिले के लिए दूसरे चरण में एक हजार अभिभावकों ने ऑनलाइन आवेदन किए हैं। 15 अप्रैल आवेदन की आखिरी तिथि है। आवेदनों की स्क्रूटनी के बाद जिलाधिकारी की अध्यक्षता में 25 अप्रैल को लाटरी से स्कूलों का आवंटन हो जाएगा। हालांकि, अभिभावकों को मई में आवेदन करने का एक मौका तो मिलेगा, लेकिन स्कूलों में पढ़ाई शुरू होने से बच्चे पिछड़ जाएंगे।
शिक्षा हर बच्चे का मौलिक अधिकार है। इसके लिए केंद्र सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू किया है। इसमें निजी स्कूलों के लिए प्री नर्सरी से कक्षा एक तक 25 फीसदी सीटें आरक्षित करने का नियम है, ताकि गरीब बच्चे भी निजी स्कूलों में शिक्षा ले सकें। निजी स्कूल आरटीई में दाखिला देने में आनाकानी करते हैं। इसके लिए डीएम की अध्यक्षता में कमेटी भी गठित है। कमेटी गरीब बच्चों के दाखिले के साथ स्कूलों की निगरानी करती है। नया शिक्षा सत्र में निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के दाखिले की प्रक्रिया 15 फरवरी से शुरू हो चुकी है। मुरादाबाद जिले में पहले चरण में 597 अभिभावकों ने दाखिले के लिए आवेदन किया था। इनमें 293 बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिल दिया गया। 16 मार्च से शुरू दूसरे चरण में अब तक एक हजार अभिभावक आवेदन कर चुके हैं। तीसरे चरण में एक मई से 10 मई तक आवेदन होंगे।
आवेदन के लिए पात्रता
- तीन साल से सात साल की उम्र के बच्चों के दाखिल के लिए आवेदन
- आवेदक अपने ही वार्ड के निजी स्कूल के लिए आवेदन कर सकता है
- वार्ड में अधिकतम 10 स्कूल चुनने का विकल्प है, लेकिन आवंटन लाटरी से होगा
- स्थायी प्रमाण पत्र, एससी एसटी एवं ओबीसी प्रमाण पत्र की अनिवार्यता
- अभिभावक की सालाना आमदनी एक लाख रुपये से कम होनी चाहिए
- बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र की अनिवार्यता
- इस वेबसाइट पर आवेदन ह्म्ह्लद्ग.25.ह्वश्चह्यस्रष्.शह्म्द्द
वार्ड से बाहर का स्कूल भरने पर रिजेक्ट होगा आवेदन
आरटीई में अभिभावक अपने ही वार्ड के निजी स्कूलों में दाखिले के लिए आवेदन कर सकते हैं। पहले चरण में अधिकांश आवेदकों ने अपने वार्ड से बाहर के स्कूल भरे थे, जिसके चलते आवेदन रिजेक्ट हो गए।
कटार शहीद और मुगलपुरा में नहीं कोई निजी स्कूल
शहरी क्षेत्र में कटार शहीद और मुगलपुरा वार्ड में कोई भी निजी स्कूल नहीं हैं। इन वार्डों के बच्चों के दाखिला आवेदन के लिए कोई विकल्प नहीं है। लिहाजा, इन वार्डों के बच्चे आरटीई में निजी स्कूलों में शिक्षा से वंचित हैं।
निजी स्कूलों का 30 लाख बकाया
आरटीई में गरीब बच्चों को शिक्षा देने वाले स्कूलों को सरकार पैसा देती है। पिछले सत्र में 100 स्कूलों में करीब एक हजार बच्चों को दाखिला दिया गया। निजी स्कूलों का करीब 30 लाख रुपये बकाया है।