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वाहन प्रेमियों को लॉकडाउन भाया, 4500 ने वाहनों का ऑनलाइन पंजीकरण कराया

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मुरादाबाद। लॉकडाउन में भले ही अन्य विभाग पाई पाई को तरस गए हों पर वाहनों केशौकीनों ने जमकर अपने वाहनों के पंजीकरण कराए। लगभग पांच करोड़ रुपये की कीमत के वाहनों के पंजीकरण हुए जिनमें राजस्व के रूप में कोषागार को 47 लाख रुपये प्राप्त हुए। हालांकि माना यह जा रहा है कि इस माह कुछ छूट मिली तो सरकार को इस रूप में कई विभागों से और ज्यादा राजस्व प्राप्त हो सकता है।
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कोरोना संक्रमण के कारण चल रहे लॉकडाउन में अधिकतर प्रतिष्ठान बंद ही हैं। इस दौरान सरकारी कोष घटता जा रहा है और जनता की ओर से दिए गए राजस्व का हिस्सा इसमें काफी कम जमा हो रहा है। अप्रैल माह की बात करें तो स्टांप व आबकारी जैसे महत्वपूर्ण विभागों से पैसा आया ही नहीं। ऐसे में थोड़ा पैसा जो आया वह भी उप संभागीय परिवहन विभाग से पंजीकरण शुल्क के रूप में प्राप्त हुआ। अप्रैल माह में 46 लाख रुपये पंजीकरण शुल्क के रूप में कोषागार में जमा किए गए। दरअसल, लॉकडाउन में विभाग ने इसका फायदा उठाया और ऑनलाइन पंजीकण की सुविधा को ऑन रखा। इस का परिणाम यह रहा कि कुल 4517 वाहनों का इस माह पंजीकरण कराया गया। इनमें 141 कमर्शियल वाहनों का पंजीकरण शामिल रहे। कमर्शियल वाहनों पर वाहन की कीमत का दस प्रतिशत जबकि घरेलू वाहन पर आठ प्रतिशत पंजीकरण शुल्क जमा किया जाता है। महकमे के अधिकारियों का कहना था कि लॉकडाउन में नए वाहन तो कम खरीदे गए पर लोगों ने अपने पुराने मामले निपटा दिए।
कोष से चले गए 176 करोड़
अप्रैल माह में जिला कोषागार से कुल 176 करोड़ रुपये जारी किए गए। इनमें अधिकतर रकम सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाह, जीपीएफ तथा पेंशन आदि में बांटा गया है। इसके अलावा मात्र 26 करोड़ रुपये की प्राप्ति है। इसमें लगभग 25 करोड़ रुपये तो किसानों से लेकर सरकार से गेहूं खरीदने वाली एफसीआई जैसे सरकारी प्रतिष्ठानों से ही प्राप्त हुआ है। लगभग सवा करोड़ रुपये सरकारी भवनों के किराए से प्राप्त हुआ है। जनता से मिले शुल्क के रूप में तो बस आरटीओ ऑफिस से ही पैसा जमा कराया गया है।
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इस बार प्राप्तियां कम रहीं: सीटीओ
लॉकडाउन केचलते अप्रैल माह में 46 लाख रुपये आरटीओ से मिले। बाकी विभाग तो ठंडे ही रहे। 176 करोड़ रुपये खाते से दिए गए। प्राप्तियां तो बेहद कम रहीं। कुल 26 करोड़ रुपये ही आए जिनमें सरकारी विभागों की प्राप्तियां शामिल हैं।
अब कोष भर देगी शराब, सात दिन में दस करोड़ की बिकी
मुरादाबाद। लॉक डाउन पार्ट थ्री में मुरादाबाद के लोगों ने सात दिन में दस करोड़ की शराब खरीदी है। ये पहला मौका है जब एक सप्ताह में इतनी ज्यादा शराब की बिक्री हुई। इसमें देशी, अंग्रेजी और बीयर तीनों शामिल हैं। भले ही सरकारी कोष खाली चल रहा हो पर अब शराब उसे भरने का काम करेगी।
कोरोना संक्रमण को फैलाने से रोकने के लिए लॉक डाउन के पहले और दूसरे चरण में अन्य दुकानों के साथ ही शराब की बिक्री पर भी रोक लगाई थी, लेकिन तीसरे चरण के पहले दिन यानी चार मई से शराब की दुकानों को खोल दिया गया था। जिससे तीन दिन तक शराब की दुकानों पर खूब लाइनें लगी रहीं। कहीं सोशल डिस्टेंस की धज्जियां उड़ाई र्गइं तो कहीं लाइन में लगने को लेकर मारपीट तक हुई। शराब की दुकानें सुबह दस बजे से लेकर शाम सात बजे तक खोलने के आदेश हैं। मुरादाबाद में हॉटस्पॉट क्षेत्र को छोड़कर बाकी क्षेत्र की दुकानों खेाली गई हैं। पंद्रह देशी, 22 अंग्रेजी और 23 बीयर की दुकानें बंद हैं। इसके बावजूद जनपद में चार मई से दस मई के बीच दस करोड़ रुपये की देशी अंग्रेजी और बीयर की बिक्री हो चुकी हैं। लॉक डाउन से पहले सामान्य दिनों में एक सप्ताह में छह से सात करोड़ की शराब बिक्री होती थी। आबकारी इंस्पेक्टर सिद्धार्थ गौतम ने बताया कि एक सप्ताह में दस करोड़ की बिक्री हुई है।
38656 वाहनों के चालान, पुलिस ने 31 लाख का शमन वसूला
मुरादाबाद। लॉक डाउन में पुलिस अब तक 38656 वाहनों के चालान कर चुकी है। इसके अलावा मौके पर ही 31 लाख रूपये से ज्यादा का शमन शुल्क के रूप में वसूल चुकी है।
लॉक डाउन का सख्ती से पालन कराने के लिए जनपद में 63 बैरियर प्वाइंट बनाए गए हैं। जहां पुलिस वाहनों की चेकिंग की गई है। इन प्वाइंटों पर पुलिस ने एक लाख 48 हजार 291 वाहनों को चेक किया जा चुका है। जिसमें 38656 वाहनों के चालान कर दिए हैं। जबकि 3119200 रुपये शमन शुल्क के रूप में वसूले हैं। इसके अलावा कागजात न दिखाने पर 995 वाहनों को सीज किया जा चुका है। सबसे ज्यादा 179 (1) (नियमों का पालान न करना और आदेशों का पालन न करने) में चालान किया गया। इसके अलावा दूसरे नंबर पर हेलमेट में चालान काटे गए हैं। 22 मार्च से लेकर 11 मई तक मुरादाबाद में लॉक डाउन उल्लंघन के 2842 केस दर्ज हो चुके हैं। 5808 लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है।
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