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टीबी की दवा की मारामारी, मरीजों की लाचारी

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मुरादाबाद। ट्यूबरोक्युलोसिस (टीबी) की खतरनाक श्रेणी मल्टी ड्रग रजिस्ट्रेंशन (एमडीआर) के मरीजों के लिए दवा का संकट हो गया है। सरकारी अस्पतालों में एमडीआर की एक दवा की सप्लाई बाधित हो गई है। इससे मरीजों को मेडिकल स्टोरों से दवा खरीदनी पड़ रही है। कई मरीज बाजार से दवा नहीं खरीद पा रहे हैं। इलाज बाधित होने से दूसरे लोगों के लिए खतरा बन सकते हैं।
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2025 तक उत्तरप्रदेश को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग जागरूकता के साथ साल में चार बार मरीजों की स्क्रीनिंग अभियान चलाता है। चिह्नित मरीजों का सरकारी अस्पतालों में फ्री में इलाज के साथ पांच सौ रुपये मासिक पौष्टिक आहार भत्ता दिया जाता है। निजी अस्पतालों में इलाज करवाने वाले मरीजों को भी भत्ता मिलता है। टीबी का अधूरा इलाज जानलेवा है। इससे रोगी खतरनाक एमडीआर की श्रेणी आ जाता है। टीबी का इलाज छह माह और एमडीआर का दो साल तक इलाज चलता है। एमडीआर के मरीजों की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिसके चलते हाई पावर की दवाएं दी जाती हैं। दवाएं बाजार में काफी महंगी हैं। सरकारी अस्पताल में पिछले कुछ दिनों से एमडीएम के मरीजों की एक दवा नहीं हैं। दवा की सरकारी सप्लाई बाधित होने से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। मरीज दवा के लिए भटक रहे हैं। दवा कब तक आएगी, मरीजों को जानकारी नहीं दी जा रही है।

- एमडीआर के मरीजों की एक दवा की सप्लाई नहीं मिल रही है। मरीज बाजार से दवा की खरीद रहे हैं। मुख्य चिकित्साधीक्षक डा. विनीता अग्निहोत्री को दवा की सप्लाई बाधित होने की जानकारी दी गई है। अस्पताल के स्तर पर जल्द ही दवा की खरीद की जाएगी, ताकि मरीजों को मेडिकल से खरीदनी न पड़े। - दिनेश कुमार प्रेमी, जिला क्षय रोग अधिकारी
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263 एमडीआर के मरीज
मुरादाबाद जिले में 263 एमडीआर के मरीज चिह्नित हैं। मरीजों की दो साल तक दवाएं चलती हैं। सरकारी अस्पतालों में इलाज और दवाएं मुफ्त में दी जाती हैं। पिछले साल एमडीआर की आशंका के चलते 7666 टीबी के मरीजों की जांच की गई। इनमें 263 मरीजों में एमडीआर की पुष्टि हुई। चिह्नित मरीजों का इलाज चल रहा है।
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