मंडल की 22 चीनी मिलों में से 10 चीनी मिलों ने अभी तक 75 हजार किसानों के साढ़े तीन अरब रुपये का भुगतान नहीं किया है। जबकि इनमें से पांच चीनी मिलों के डिफाल्टर होनेे के कारण बैंकों ने सरकार केआदेश के बावजूद कर्जा देने से मना कर दिया है। ऐसे में इन मिलों के सामने चीनी बेचकर ही किसानों के भुगतान का ही विकल्प रह गया है।
बुधवार को भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक केअध्यक्ष ऋषि पाल सिंह अन्य पदाधिकारियों के साथ कमिश्नर अनिल राज कुमार से मिले थे। किसानों ने कहा कि अभी तक मंडल के 50 फीसदी किसानों को बकाए का भुगतान नहीं हुआ है। जबकि सरकार ने 30 नवंबर तक भुगतान करने का वादा किया था। इसके बावजूद किसानों ने 11 दिसंबर तक भुगतान होने का इंतजार किया। उसी के बाद कमिश्नर कार्यालय में भुगतान की फरियाद लेकर आए हैं।
किसानों ने कहा कि अगवानपुर चीनी मिल केपास तो किसानों का 69 करोड़ से अधिक बकाया है। इस मिल को तो बैंकों ने सॉफ्ट लोन देेने से मना कर दिया है। इसके अलावा बिलाई, बेलवाड़ा, मझावली और करीमगंज चीनी मिल को भी बैंकों ने कर्जा देने से मना कर दिया है। इन मिलों केप्रबंधकों के पास स्टाक में उपलब्ध चीनी से ही भुगतान करने का ही विकल्प है।
मंडल की चांदपुर, बिजनौर, दनपुरा, बिलारी चीनी मिलों पर भी किसानों का बकाया है। इन मिलों को शासन की संस्तुति पर बैंकों से साफ्ट लोन मिलने का इंतजार है। उसी के बाद यह मिल किसानों को भुगतान कर सकेंगी।यह तो पिछले साल के बकाए का है, इस साल का तो किसानों को एक धेले का भुगतान नहीं हुआ है।
किसान नेताओं ने कमिश्नर से सट्टे की परची की समस्या दूर कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अधिकांश किसानों को गन्ने केहिसाब से पर्ची नहीं दी र्गईं हैं। मिल भी किसानों का गन्ना लेने में देरी कर रहीं हैं। जिसकी वजह से उनकी गेहूं की फसल की बुवाई में देरी हो रही है। इन सभी समस्याओं का समाधान कराने के बारे में कमिश्नर ने किसानों को आश्वासन दिया।