संयुक्त निदेशक चिकित्सा मुरादाबाद मंडल डा. सत्य सिंह ने मंगलवार को जिला एवं महिला अस्पताल की औचक निरीक्षण किया। अस्पताल परिसर में गंदगी और आवासीय कालोनियों की नालियां बंद देख संयुक्त निदेशक ने नाराजगी जताई। ठेकेदार को तलब कर सफाई व्यवस्था दुरुस्त न होने पर भुगतान रोकने के निर्देश दिए।
अस्पतालों में चिकित्सा व्यवस्था देखने संयुक्त निदेशक डा. सत्य सिंह ने मंगलवार सुबह औचक महिला और जिला अस्पताल पहुंच गए। संयुक्त निदेशक को देख अस्पताल प्रशासन में खलबली मच गई। संयुक्त निदेशक ने दोनों ही अस्पतालों में वार्ड और इमरजेंसी का निरीक्षण किया और मरीजों से अस्पतालों में मिलने वाली चिकित्सा सुविधाओं को लेकर बातचीत की।
महिला अस्पताल के मुख्य गेट के पास फड़ एवं ठेलियां लगने और नालियों की सफाई नहीं होने पर नाराजगी जताई। सीएमएस डा. कल्पना सिंह ने कहा कि मुख्य गेट पर कई बार फड़ एवं ठेलियों को हटा दिया है। इसके बाद भी फड़ एवं ठेलियां फिर से लग जाती हैं। उनकी वजह से गंदगी होती है। अस्पताल के भवनों और आवासीय कालोनी क्षेत्र का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद जिला अस्पताल की सीएमएस डा. ज्योत्सना पंत और एमएस डा. राजेंद्र कुमार ने पूरे अस्पताल का निरीक्षण कर व्यवस्थाएं दुुरुस्त करने के निर्देश दिए।
ओपीडी से लेकर वार्ड मरीजों से फुल
मुरादाबाद। बारिश के बाद संक्रामक बीमारियां फैलने से जिला अस्पताल मरीजों से पैक हो गया है। ओपीडी से लेकर वार्डों में मरीजों की भीड़ है। ओपीडी में मरीजों को घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है। मरीजों का दबाव बढ़ने से अस्पताल में दवा का भी संकट गहरा गया है। मरीजों को ओपीडी में डाक्टर को दिखाने से लेकर दवाओं के लिए भटकना पड़ रहा है।
बुखार, खुजली और डायरिया तेजी से फैल रहा है। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना ढाई हजार से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। एमएस डा. राजेंद्र कुमार के मुताबिक अस्पताल की क्षमता 187 बेड है, लेकिन वर्तमान में 215 बेड लगे हैं। बच्चा वार्ड भी फुल है। बच्चा वार्ड में बेड खाली नहीं होने पर एक ही बेड पर दो-दो बच्चों को भर्ती करने की स्थिति खड़ी हो रही है। एमएस ने बताया कि ओपीडी में सुबह से मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। ओपीडी पहुंचने वाले 75 फीसदी मरीज सीजनल बीमारियों से पीड़ित हैं। बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में तीन सौ से अधिक बच्चे पहुंच रहे हैं।
पेड़ गिरा, हादसा टला
जिला अस्पताल परिसर में विशालकाय पेड़ गिर गया। पेड़ रात में गिरा, जिससे बड़ा हादसा टल गया। अस्पताल की इमरजेंसी के पास रैन बसेरा के आगे खाली जगह है। इसमें अमलताश का काफी बड़ा पेड़ था। इमरजेंसी और रैन बसेरा में भर्ती मरीजों के तीमारदार अक्सर पेड़ के पास बैठे रहते थे। सोमवार रात पेड़ जड़ समेत उखड़कर गिर गया।