मुरादाबाद। बिजली व्यवस्था को निजी हाथों में दिए जाने से महकमे को हर रोज दो करोड़ रुपये का नुकसान भुगतना पड़ रहा है। उपभोक्ता बिजली के बिल जमा करने के लिए कैश काउंटर तक तो पहुंच रहे हैं। लेकिन काउंटर बंद होने की वजह से उन्हें मायूसी ही हाथ लग रही है।
बिजली अधिकारियों का कहना है कि हर महीने के अंतिम पांच दिन बिजली विभाग के लिए खास रहते हैं। इन पांच दिनों में महानगर के तीनों डिवीजन में हर रोज तकरीबन दो करोड़ रुपये जमा किए जाते हैं। ये आंकड़ा मार्च माह में तो तीन करोड़ से भी ऊपर भी पहुंच जाता है। लेकिन इस साल पहली बार ऐसा हुआ है कि इन पांच दिनों में दस फीसदी का भुगतान नहीं हो पा रहा है। अवकाश में कैश काउंटर खोले जाते हैं। लेकिन इस बार सभी कैश काउंटर बंद हैं। बिजली अधिकारी और कर्मचारियों ने बिजली व्यवस्था के निजीकरण के कारण छुट्टी में कैश काउंटर खोलने से इंकार कर दिया। जिसका महकमे का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। महानगर के बिजली उपभोक्ताओं पर पंद्रह करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया है। अगर प्रदेश की बात की जाए तो प्रतिदिन ढाई सौ करोड़ रुपये का महकमे में नुकसान हो रहा है।
कैश वैन पर नहीं पहुंच रहे उपभोक्ता
मुरादाबाद। बिजली व्यवस्था के निजीकरण के विरोध के कारण अवकाश में कैश काउंटर बंद है। को बंद करने का निर्णय लिया गया। अधिशासी अभियंता संजय कुमार जैन ने बताया कि उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए कैश वैन चालू की हैं। यह वैन सुबह नौ बजे से एक बजे तक इंपीरियल तिराहे टैक्सी स्टैंड बिजली घर पर खड़ी रहती है। जबकि डेढ़ बजे से चार बजे तक बुद्धि विहार बिजली घर पर रहती है। लेकिन उपभोक्ता कैश वैन पर नहीं पहुंच पा रहे हैं।