मुरादाबाद। रामगंगा और गांगन नदी को दूषित पानी से बचाने के लिए प्रस्तावित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) पांच साल बाद भी जमीन के इंतजार में अटका हुआ है। 2020-21 में परियोजना की प्रक्रिया शुरू हुई थी लेकिन अब तक फाइलों और बैठकों के बीच ही 409 करोड़ रुपये की यह परियोजना उलझी हुई है। एसटीपी के निर्माण के लिए नगर निगम को आवश्यक भूमि खरीदकर जल निगम को हस्तांतरित करनी है जहां 65 एमएलडी क्षमता का एसटीपी स्थापित होना है लेकिन जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया ही पूरी नहीं हो पाई है।
409 करोड़ रुपये की लागत से यह एसटीपी करुला और आवास विकास फेज-2 में बनना है। योजना का उद्देश्य था कि दिल्ली रोड और संभल रोड के नालों का गंदा पानी शोधित कर गांगन और रामगंगा नदी में छोड़ा जाए ताकि शहर का सीवर और नालों का गंदा पानी सीधे नदी में न पहुंचे। मगर जमीन न मिलने के कारण करूला का प्रोजेक्ट लटका हुआ है और इसका असर आवास विकास क्षेत्र में बनने वाले एसटीपी पर भी पड़ रहा है।
करूला में एसटीपी के लिए करीब 17 हजार वर्ग मीटर भूमि की आवश्यकता है जबकि जल निगम के पास महज सात हजार वर्ग मीटर जमीन ही उपलब्ध है। शेष करीब दस हजार वर्ग मीटर भूमि नगर निगम को खरीदनी है। कई बार जमीन की अनुमानित लागत तय की गई, प्रस्ताव तैयार हुए और एडीएम वित्त की अध्यक्षता में गठित समिति की बैठकें भी हुईं लेकिन तकनीकी आपत्तियों, मूल्यांकन विवाद और प्रक्रियागत देरी के चलते मामला हर बार टलता गया। करुला के एसटीपी प्लांट की वजह से ही आवास विकास फेज-2 में बनने वाले 15 एमएलडी क्षमता के एसटीपी का निर्माण कार्य नहीं शुरू हो पा रहा है। आवास विकास में बनने वाले एसटीपी के लिए जमीन उपलब्ध है।
- 2027 तक बनना है एसटीपी
जल निगम की योजना के अनुसार 80 एमएलडी क्षमता वाले करुला और आवास विकास एसटीपी का निर्माण कार्य 2027 तक पूरा होना था। इसके जरिए करीब तीन लाख घरों को सीवर नेटवर्क से जोड़कर गंदे पानी का शोधन किया जाना है। लेकिन जमीन अधिग्रहण में देरी से लक्ष्य पर संकट मंडरा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि 2027 तक अब एसटीपी का संचालन शुरू हो पाना लगभग मुश्किल है।
- चार में से एक ही एसटीपी हो सका चालू
शहर में प्रस्तावित चार एसटीपी में से केवल एक ही पूरी क्षमता से संचालित हो रहा है। रामपुर रोड पर हनुमान मूर्ति तिराहे के पास 58 एमएलडी का एसटीपी 2021 से चालू है। चक्कर की मिलक में बना 25 एमएलडी का एसटीपी अभी ट्रायल पर है। जबकि बुद्धि विहार और करुला के एसटीपी जमीन की बाधा में फंसे हुए हैं।
वर्जन
अभी हमें जमीन उपलब्ध नहीं हो पाई है। जमीन मिलते ही टेंडर जारी किया जाएगा और काम शुरू कराया जाएगा। - फराहीम अहमद, अधीक्षण अभियंता, जल निगम