मुरादाबाद। मौसम की मार से परेशान किसानों पर अब सरकारी क्रय केंद्रों की अव्यवस्थाएं भारी पड़ने लगी हैं। क्रय केंद्रों पर किसानों के गेहूं की क्वालिटी खराब बताकर वापस किया जा रहा है। फजीहत से परेशान किसान गेहूं को सरकारी क्रय केंद्रों में लाने के बजाए बिचौलियों के माध्यम से उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले की फ्लोर मिलों को बेचने लगे हैं। फ्लोर मिलें किसानों के खेतों से ही गेहूं का उठान कर जमाखोरी कर रही हैं। स्थानीय प्रशासन एवं मंडी समिति जिले से बाहर जाने वाले गेहूं को पकड़ने में नाकाम हो रहा है।
रबी की फसल गेहूं की कटाई लगभग आखिरी चरण में है। अप्रैल में बारिश से गेहूं की क्वालिटी खराब हुई है। मई दूसरे सप्ताह में भी मौसम विभाग ने बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। किसान खेतों से फसल को समेटने में जुटा है। मुरादाबाद जिले में गेहूं खरीद के लिए 107 सेंटर खोले गए हैं। 71 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा गया है। लस्चर लॉस (गेहूं की क्वालिटी खराब होने) से सरकारी खरीद बाधित हो रही है। केंद्रों से किसानों को लौटाया जा रहा है। गेहूं के सैंपल जांच कराने से लेकर बेचने तक किसानों को केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। अधिकतर केंद्रों में पीने का पानी से लेकर पंखों की व्यवस्था नहीं है।
भुगतान के लिए भी इंतजार करना पड़ रहा है। सरकारी समर्थन मूल्य 1840 रुपये प्रति कुंटल हैं। व्यवस्थाओं से परेशान होकर किसान बिचौलियों को गेहूं बेच रहे हैं। बिचौलिए खेतों से ही गेहूं का उठान कर रहे हैं और 1800 रुपये प्रति कुंटल का भाव दे रहे हैं। किसान तमाम झंझट से बचने के लिए सीधे बिचौलियों को गेहूं बेच रहा है। बिचौलिए कमीशन पर उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के काशीपुर, रुद्रपुर और जसपुर की फ्लोर मिलों और आढ़तियों को गेहूं बेच रहे हैं। मुरादाबाद देहात, ठाकुरद्वारा और भगतपुर टांडा क्षेत्र का अधिकतर गेहूं सीधे उत्तराखंड जा रहा है। जानकारों का कहना है कि 15 जून तक सरकारी खरीद होनी है। इसके बाद गेहूं का भाव में तेजी आएगी। फ्लोर मिल और आढ़ती अभी गेहूं की जमाखोरी करने के बाद मनमाने कीमत पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाएंगे। फ्लोर मिलों को वैसे भी गेहूं की जरूरत पड़ेगी।
- किसान अपनी उपज बेचने के लिए स्वतंत्र है। लेकिन बिचौलिए बिना मंडी शुल्क भुगतान के गेहूं दिल्ली और उत्तराखंड भेज रहे हैं। इसकी धरपकड़ की जा रही है। गुरुवार को पाकबड़ा और हाईवे से दो ट्राली गेहूं पकड़ा है। - मंडी सचिव, अशोक कुमार सिंह
- सरकारी क्रय केंद्रों की संख्या कम है। जहां खुले भी हैं किसानों को परेशान किया जा रहा है। मड़ाई के बाद 100 कुंटल गेहूं घर पर पड़ा है। गांवों में बिचौलिये घूम रहे हैं। कई किसान बिचौलियों को गेहूं बेच रहे हैं। - नीटू चौहान, काश्तकार
- किसान कहीं भी गेहूं बेचने के लिए स्वतंत्र है। किसानों को 1840 रुपयं कुंटल नगद भाव मिल रहा है। लेकिन कुछ बिचौलिए काश्तकार बनकर गेहूं खरीदकर दिल्ली और उत्तराखंड भेज रहे हैं। इनकी धरपकड़ की जा रही है। - लक्ष्मी शंकर सिंह, एडीएम प्रशासन