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स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही, टीकाकरण पर पड़ रही भारी

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मुरादाबाद।
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स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही मीजल्स रुबेला (एमआर) टीकाकरण अभियान पर भारी पड़ रही है। जिसके चलते ही मुरादाबाद एमआर टीकाकरण अभियान में प्रदेश के सबसे पिछड़े जिलों में शामिल है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूएनडीपी की संयुक्त टीम के निरीक्षण से इसका खुलासा हुआ है। टीम ने निरीक्षण रिपोर्ट में टीकाकरण कर्मियों को दो सालों से भुगतान नहीं करने एवं आंगनबाड़ी वर्कर का मानदेय नहीं दिए जाने का जिक्र किया है। राष्ट्रीय स्वास्थ मिशन के निदेशक ने सीएमओ का जवाब तलब कर तीन दिन में रिपोर्ट मांगी है।
सूत्रों के मुताबिक विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूएनडीपी की टीम दो दिन मुरादाबाद जिले में घूमी। टीम ने ब्लाकवार एमआर टीकाकरण की समीक्षा की। टीकाकरण में पिछड़ने की वजह जानी। कर्मचारियों से पूछताछ की। इसके बाद टीम ने निरीक्षण रिपोर्ट राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक पंकज कुमार को सौंप दी। रिपोर्ट में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का जिक्र किया है। निरीक्षण टीम ने कहा कि मुरादाबाद में एमआर अभियान की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। शहरी क्षेत्र के टीकाकरण कराने वाले कर्मियों को वर्ष 2016-2017 और 2017-2018 का भुगतान नहीं हुआ है।
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2017-2018 का पल्स पोलियो अभियान में पर्यवेक्षकों का भुगतान लटकाया है। कोल्ड चेन हैंडलर को प्रोत्साहन राशि का भुगतान दो सालों से नहीं हुआ है। इंद्र धनुष अभियान में कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का तीन साल से मानदेय भुगतान नहीं हुआ है। इससे कर्मचारी टीकाकरण अभियान में रुचि नहीं ले रहे हैं और टीकाकरण प्रभावित हो रहा है। टीम ने निरीक्षण रिपोर्ट में कहा कि कर्मियों का भुगतान नहीं हुआ तो भविष्य में नियमित टीकाकरण का लक्ष्य पूरा करना संभव नहीं होगा। निदेशक ने इसके लिए सीएमओ को जिम्मेदार ठहराया है। सीएमओ को कर्मियों का लंबित देयकों का भुगतान कराने के साथ तीन दिन में रिपोर्ट मांगी है।
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