जिला अस्पताल में दवाओं के संकट के साथ जन औषधि केंद्र से भी मरीजों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। बारिश के बाद खुजली, फोड़े एवं फुंसी और बुखार के मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है। जिला अस्पताल में सामान्य दवाएं तक नहीं हैं। अस्पताल परिसर में मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए खोला गया जन औषधि केंद्र भी मरीजों की परेशानी दूर नहीं कर पा रहा है। जन औषधि केंद्र में दवाएं नहीं हैं।
मौसमी बदलाव से निजी और सरकारी अस्पताल की ओपीडी बुखार, डायरिया, एलर्जी के मरीजों से भरी पड़ी हैं। जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। जरनल फिजिशियन और स्किन विशेषज्ञ की ओपीडी में मरीजों का सबसे अधिक दबाव है। डाक्टर को दिखाने के बाद मरीज दवाओं के लिए भटक रहे हैं। डाक्टर पर्चे पर दवाएं तो लिख रहे हैं, लेकिन जिला अस्पताल की औषधि केंद्र में दवाएं नहीं हैं। कई मरीज पर्चे पर दूसरी दवा का विकल्प लिखवाने डाक्टर के कक्ष तक पहुंच रहे हैं तो अधिकांश मरीज अस्पताल परिसर में ही प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र जा रहे हैं। जन औषधि केंद्र का बुरा हाल है।
जिला अस्पताल परिसर में खोले गए जन औषधि केंद्र में 650 तरह की दवाएं और 150 सर्जिकल उपकरणों की बिक्री के लिए सरकार से अनुबंध है। लेकिन जनऔषधि केंद्र में मात्र 47 तरह की दवाएं उपलब्ध हैं। इनमें भी बुखार, खासी-जुकाम, एलर्जी की सामान्य दवाएं और क्रीम नहीं हैं। सर्जिकल कोई उपकरण नहीं है। फार्मेसिस्ट कैलाश सैनी के मुताबिक केंद्र में दवाओं की खपत की तुलना में आपूर्ति बहुत कम है। जन औषधि केंद्रों के लिए दिल्ली से दवाओं की सप्लाई लखनऊ होती है। लखनऊ से दवाएं जन औषधि केंद्रों तक पहुंचती हैं। मांग के अनुरूप आपूर्ति कम होने से मरीजों को वापस लौटना पड़ता है। अस्पताल और जन औषधि केंद्र से दवाएं नहीं मिलने पर मरीजों को मेडिकल स्टोर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
- अस्पताल में मरीजों का दबाव काफी अधिक है। अनुबंधित कंपनियां सप्लाई नहीं दे रही हैं। जैसे-तैसे दवाओं का वितरण हो रहा है। अस्पताल में जो दवाएं उपलब्ध हैं मरीजों को उन्हें दिया जा रहा है। - संदीप बड़ोला, चीफ फार्मेसिस्ट, जिला अस्पताल