मुरादाबाद। नई बोतल में पुरानी शराब का जुमला मुरादाबाद के शराब कारोबारियों पर सटीक बैठ रहा है। लाटरी प्रणाली से देसी, अंग्रेजी और बीयर की दुकानों का आवंटन होने के बाद एक अप्रैल से कागजी फाइलों में दुकानदार बदल गए हैं। लेकिन, शराब कारोबार पर इस साल भी पूरी तरह सिंडिकेट का कब्जा है। अधिकतर डमी नामों से दुकानें आवंटित हुई हैं, जिसके चलते नई दुकानों में पुराने कोटे की ही शराब बिक रही है।
मार्च के तीसरे सप्ताह में आबकारी विभाग ने एक मॉडल शाप, बीयर की 61, देसी शराब की 145 और अंग्रेजी की 60 दुकानों का लाटरी प्रणाली से आवंटन हुआ है। देसी शराब की 15 दुकानों का आवंटन नहीं हो सका है। नई व्यवस्था में होलोग्राम के स्थान पर शराब की बोतलों पर बार कोड सिस्टम लागू कर दिया है।
नए आवंटन में शराब की कीमतों में भी वृद्धि हुई है। आबकारी विभाग ने दुकानों का आवंटन तो कर दिया है, लेकिन शराब की बार कोड पैकिंग में शराब की उपलब्धता नहीं कराई है। दुकानों में होलोग्राम मार्का वाली ही शराब बेची जा रही है। जानकारों का कहना है कि अधिकतर दुकानें भले ही अलग-अलग लोगों के नामों से निकली हैं, लेकिन 80 फीसदी कारोबार पर सिंडिकेट का कब्जा है। कारोबारियों का मार्च महीने का कोटा बकाया है, जिसे नई दुकानों में खपाया जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि इस बार शराब कंपनियों से जुड़े लोगों ने भी अपने परिचितों के नाम से दुकानों के लिए लाटरी डलवाई है। उनके नाम से दुकानें भी आवंटित हुई है। थोक के कारोबार पर भी पूरी तरह सिंडिकेट हावी रहा है। लोगों का कहना है कि शराब कारोबार पर सिंडिकेट का कब्जा होने से उनकी मनमानी बढ़ेगी। ओवर रेट शराब की बिक्री होगी और सिंडिकेट के दबाव में आबकारी विभाग ओवर रेटिंग पर अंकुश नहीं लगा पाएगा।
‘नई व्यवस्था का पहला दिन होने के कारण कुछ अव्यवस्था हुईं हैं। लेकिन फिर से पुराने लाइसेंसियों के काबिज होने की कोई जानकारी नहीं है। लाटरी प्रक्रिया में सभी को आवेदन का मौका मिला और किस्तम से लाटरी निकली हैं।’ कुलदीप मिश्रा, जिला आबकारी अधिकारी,