मुरादाबाद। दिवाली की रात हुई आतिशबाजी शहर में 27 लोगों पर भारी पड़ गई। इन लोगों की आंखों में पटाखों का बारूद चला गया। इनमें से आठ की स्थिति गंभीर है और रोशनी जाने का खतरा है। चार मरीज एम्स व अन्य अस्पतालों में दिखाने के लिए दिल्ली चले गए हैं। गनीमत है कि यह आंकड़ा पिछले वर्ष के मुकाबले आधा है।
पिछले वर्ष आंख में पटाखों के कारण नुकसान होने के लगभग 50 केस आए थे। दिवाली की रात जिला अस्पताल की इमरजेंसी में दो मरीज पहुंचे। इनकी आंख में पटाखे का बारूद चला गया था। कॉर्निया पर ज्यादा असर नहीं था, इसलिए डॉक्टर ने चेक करने के बाद दवा देकर घर भेज दिया। इसी तरह सीएल गुप्ता नेत्र संस्थान में सात मरीज, डॉ. पल्लव अग्रवाल के पास दो मरीज, डॉ. अतुल नाथ, डॉ. गिरजेश केन के पास छह मरीज व अन्य निजी चिकित्सकों के पास करीब 10 केस पहुंचे।
पटाखों के कारण बच्चों को ज्यादा परेशानी हुई। इसके बाद युवा दूसरे नंबर पर हैं। दो मामले बुजुर्गों के भी आए हैं। नेत्र चिकित्सक डॉ. पल्लव अग्रवाल के मुताबिक उनके पास एक मामला नौ साल के बच्चे का आया। उन्होंने बताया कि अनार जलाते समय उनकी आंख जख्मी हो गई। हालांकि, सर्जरी की जरूरत नहीं है, लेकिन इलाज 10 दिन तक चलेगा।
इसी तरह सीएल गुप्ता नेत्र संस्थान की डॉ. आशी खुराना के मुताबिक पटाखों से आंखें गंभीर रूप से जख्मी होने के सात मामले आए हैं। इनमें से कुछ मरीज अपनी इच्छा से हायर सेंटर चले गए हैं। शेष को दवा दे दी गई है।
इन रसायनों से होता है आंखों को नुकसान
डॉक्टरों के मुताबिक पटाखा बनाने के लिए पोटेशियम परक्लोरेट, बेरियम नाइट्रेट, मैग्नीशियम एल्युमिनियम का मिश्रण, एल्युमिनियम पाउडर, टाइटेनियम पाउडर, ब्रिम स्टोन, कैल्शियम क्लोराइड, सोडियम नाइट्रेट, बेरियम क्लोराइड, कॉपर क्लोराइड इत्यादि रसायनों के पाउडर का इस्तेमाल होता है। इनके आंख में जाने से पुतली खराब होने व रोशनी जाने का खतरा रहता है। डॉक्टर के मुताबिक पटाखों में हरी लौ बेरियम के कारण, नीली लौ कॉपर और नारंगी लौ कैल्शियम के कारण होती है।
बच्चों की आंखों में बारूद जाने के मामले सामने आए हैं। इससे आंखें जिंदगीभर के लिए कमजोर हो सकती हैं। अनार जलाते समय यह घटनाएं हुई हैं। परिजनों को ध्यान रखना चाहिए कि यदि आंख में परेशानी हुई है तो पानी से बार-बार धोएं और एंटीबायोटिक ऑइंटमेंट लगाएं।
- डॉ. पल्लव अग्रवाल, नेत्र चिकित्सक