शहर अभी घने कोहरे की चादर से बचा हुआ है, लेकिन यहां की हवा लगातार जहरीली हो रही है। शहर का वायु प्रदूषण एनसीआर को टक्कर दे रहा है। वायु गुणवत्ता सूचकांक साढ़े तीन सौ से साढ़े चार सौ बना हुआ है, जो बहुत खतरनाक से गंभीर श्रेणी में आ रहा है। चिकित्सकों के अनुसार यह स्तर स्वस्थ व्यक्ति को भी बीमार बनाने के लिए काफी है।
तापमान घटने के साथ ओस में जहरीले महीन कण जम जाने से सेहत के लिए शहर की हवा ज्यादा खराब हो गई। सुबह शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 379 दर्ज किया था। दिल्ली का 434, गाजियाबाद का 406, जबकि नोएडा का 374, कानपुर का 343 और लखनऊ का 329 रहा था। दिन में धूप निकलने से इसमें कुछ सुधार आया। शाम को एक्यूआई दिल्ली, आगरा, कानपुर, नाएडा और गाजियाबाद से नीचे आ गया। मुरादाबाद का वायु गुणवत्ता सूचकांक 339 दर्ज किया गया। हवा में अत्यंत महीन जहरीली धातुओं के कणों में पीएम 2.5 की अधिकतम मात्रा 473 माइक्रो प्रति मीटर तक जा पहुंची, जबकि शहर की हवा में इनकी औसत मौजूदगी 339 माइक्रो प्रति मीटर दर्ज की गई। वहीं पीएम 10 कणों का अधिकतम स्तर 458 रहा और औसत 257 दर्ज किया गया। तीन सौ एक एक्यूआई से ऊपर होने की वजह से यह श्रेणी बेहद खतरनाक है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी आरके सिंह का कहना है कि मुरादाबाद में इस तरह एक्यूआई बने रहे आश्चर्यजनक है। उन्होंने बताया कि इसका स्थानीय प्रभाव भी हो सकता है। जानकारी मिली है कि लाजपतनगर में मशीन के पास हलवाई की दुकान है। हो सकता है कि वह भट्टी जलाने के लिए कोयला का इस्तेमाल करता हो। इसकी जांच की जाएगी। उन्होंने बताया कि पहले मशीन से आधा किलोमीटर दूर गलियों में पीतल की भट्टियां थीं, जिनको बंद करवा दिया गया है। एक बार फिर से उन्हें भी दिखवाएंगे।