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राकेश कुमार बने रूटा के अध्यक्ष

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मुरादाबाद।
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हिंदू कालेज में रविवार को महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालय शिक्षक संघ का चुनाव संपन्न हुआ। मतदान अध्यक्ष और सचिव पद पर हुआ, जिसमें 239 शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। शांतिपूर्वक चुनाव कराने के लिए दो पर्यवेक्षकों के अलावा फुफुक्टा के अध्यक्ष खुद मौजूद रहे।
छह पदों पर चुनाव हुआ है, जिसमें चार पदों पर एक-एक प्रत्याशी होने की वजह से उन्हें निर्विरोध रूप से विजयी घोषित कर दिया गया। मतदान में शामिल 239 शिक्षकों में से दो शिक्षकों ने किसी भी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान नहीं किया। 237 मतों में से 231 मत अध्यक्ष पद पर डॉ. राकेश कुमार के पक्ष में गए और छह मत डॉ. राजकुमार सोनकर को मिले। इसलिए डॉ. राकेश कुमार को 225 मतों से निर्वाचित घोषित कर दिया गया। सचिव पद पर डॉ. टीएस चौहान को 229 मत और डॉ. चारू मेहरोत्रा को आठ मत प्राप्त हुए। डॉ. टीएस चौहान 221 मत से विजयी रहे। उपाध्यक्ष पद पर डॉ. सुंदर सिंह, डॉ. नीरज राठौर, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. राम स्वारथ, संयुक्त सचिव पद पर डॉ. सुमन सिंह, डॉ. आलोक पांडेय, डॉ. सुरेंद्र सिंह, डॉ. दिवाकर सिंह, कोषाध्यक्ष पद पर डॉ. एमबी कलहंस, फुफुक्टा प्रतिनिधि पद पर डॉ. जीतेंद्र सिंह, डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह का चुनाव किया गया। फुफुक्टा अध्यक्ष डॉ. मौजपाल सिंह ने बताया कि पुरानी रूटा को उनके संगठन ने समर्थन दिया था। कार्यकाल बीतने के बाद भी वह चुनाव कराने को तैयार नहीं है। शैक्षणिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए चुनाव आवश्यक था, इसलिए पर्यवेक्षक भेजे हैं। इस दौरान डॉ. एके शर्मा को मुख्य चुनाव अधिकारी, डॉ. जीसी पांडे, डॉ. वीरेंद्र सिंह, डॉ. पीबी तिवारी चुनाव अधिकारी थे। इसके अलावा फुफुक्टा की तरफ से पर्यवेक्षक डॉ. संतराम अग्रवाल, डॉ. वीरेंद्र सिंह मौजूद रहे।
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‘शिक्षकों की समस्या का निराकरण प्राथमिकता में’
नवनिर्वाचित अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि उनका उद्देश्य शिक्षकों की विश्वविद्यालय से संबंधित समस्याओं का निराकरण कराना है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में वर्ष 2010 में वरिष्ठता सूची बनी थी। उसके बाद से शिक्षकों की नियुक्ति हुई है, लेकिन सूची नहीं बनी है। शिक्षकों को कार्यों की जिम्मेदारी वरिष्ठता सूची के हिसाब से मिलती है। इसके अलावा शिक्षक परीक्षा व अन्य कार्यों के लिए विश्वविद्यालय जाते हैं तो वहां पेयजल व मूलभूत सुविधाओं का अभाव रहता है। विश्वविद्यालय की समितियों में कालेजों के शिक्षकों की भागीदारी कम है। कालेज में जो विषय संचालित हैं, उनका पीएचडी कोर्स वर्क विश्वविद्यालय में करवाया जा रहा है। समन्वयक भी विश्वविद्यालय के शिक्षक बनाए जा रहे हैं। उसमें हम कालेज के शिक्षकों की भागीदारी चाहते हैं। छात्रों के फार्मों में बहुत सी गलतियां विश्वविद्यालय स्तर पर होती हैं और विद्यार्थियों को भटकना पड़ता है। उनको दुरुस्त कराया जाएगा।
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