दीपा के परिजन शुक्रवार शाम चार बजे डीआरएम कार्यालय में पहुंच गए। उन्होंने रेलवे अधिकारियों की लापरवाही के कारण दीपा की मौत होने का आरोप लगाकर हंगामा किया। दीपा की बहनें डीआरएम की सरकारी गाड़ी के आगे लेट गई और हंगामा शुरू कर दी। पुलिस और आरपीएफ ने उन्हें हटाने की प्रयास किया तो भड़क गईं। सरकारी नौकरी और आवास की मांग रखी। दो घंटे बाद आश्वासन मिलने के बाद परिजन शांत हो सके।
जिला अस्पताल पहुंचे रेलवे अधिकारी दीपा के परिजनों को संतुष्ट नहीं कर पाए। यहां उन्होंने साफ लहजे में कहा कि इस मामले में रेलवे की ओर से कोई मदद नहीं मिलेगी। इस पर परिजन भड़क गए और उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। तब रेलवे अधिकारी वापस चले गए। शाम चार बजे परिजन डीआरएम दफ्तर पहुंच गए। उन्होंने डीआरएम केबिन में घुसने का प्रयास किया। लेकिन यहां तैनात आरपीएफ के जवानों ने इन्हें रोक लिया। इसके बाद दीपा की बहनें डीआरएम की सरकारी गाड़ी के आगे लेट गई। उन्होंने कहा कि दीपा के तीन बच्चे है। उनकी आर्थिक मदद की जाए। रहने के लिए आवास और पति को सरकारी नौकरी दी जाए। इसके बाद ही वह यहां से हटेंगी। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी पहुंच गए। डीआरएम अजय कुमार सिंघल ने दीपा के पिता को बुलाया। उन्हें समझाया गया कि रेलवे की ओर से हर संभव मदद की जाएगी। वह लिखित में दें। शाम छह बजे प्रशासनिक अधिकारियों ने चार लाख की आर्थिक मदद की जाएगी। इसके बाद परिजन शांत हुए और घर चले गए।