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सड़कों से लेकर प्लेटफार्म तक जाम, लोग रहे परेशान

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मुरादाबाद।
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सहायक अध्यापक (एलटी ग्रेड) की परीक्षा के मद्देनजर शहर को जाम मुक्त बनाने की पुलिस एवं प्रशासन की कार्ययोजना पूरी तरह फेल रही। परीक्षा छूटते ही हजारों लोगों के सड़क पर आने से पूरा शहर जाम हो गया। जाम में जगह-जगह वाहन रैंगते नजर आए। इससे वाहन चालकों को परेशानी झेलनी पड़ी। अधिकांश पिकेट एवं चौराहों पर पुलिस भी नजर नहीं आई। रेलवे और बस स्टेशन भी खचाखच भर गया।
रविवार को एलटी ग्रेड की परीक्षा हुई। परीक्षा में 30815 अभ्यर्थियों का पंजीकरण था। तीस हजार लोगों के शहर में पहुंचने से यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए पुलिस ने परीक्षा केंद्रों के आसपास की सड़कों पर पिकेट लगाकर रूट डायवर्जन और जाम मुक्त शहर बनाने की कार्ययोजना बनाई थी। इसके लिए प्रमुख चौराहों और सड़कों पर पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगी थी। परीक्षा शुरू होने से पहले और परीक्षा छूटने के बाद शहर को जाम झेलना पड़ा। सुबह बारिश होने के कारण जाम का ज्यादा असर नहीं दिखा। दोपहर डेढ़ बजे परीक्षा छूटते ही 15 हजार परीक्षार्थियों एवं उनके परिचितों के सड़क पर आते ही शहर जाम हो गया।
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जीजी हिंदू कालेज, एसएस इंटर कालेज बाजार क्षेत्र में हैं। इन सेंटरों से परीक्षार्थी बाहर निकलते ही पूरा बाजार और मुख्य सड़क जाम हो गई। रेलवे और बस स्टेशन भी नजदीक हैं। इस क्षेत्र में करीब आधे घंटे तक वाहन रैंगते रहे। पीलीकोठी चौराहा, फव्वारा चौक, कांठ रोड भी पूरी तरह जाम रही। बस एवं रेलवे स्टेशन खचाखच भर गए। आसपास के जिलों के अभ्यर्थी बसों से घरों के लिए निकले। लंबी दूरी वाले अभ्यर्थी रेलवे स्टेशन में उमड़ पड़े। परीक्षार्थी प्रदेश के सभी जिलों से पहुुंचे थे। प्लेटफार्म में पैर रखने की जगह तक नहीं मिली। ट्रेनाें के आते ही लोग जिस डिब्बे का दरवाजा खुला मिला उसी में चढ़ गए। सीट न मिलने पर डिब्बों में खड़े होने के साथ दरवाजों पर लटकर निकले।

स्टेशन पर झेलनी पड़ी परेशानी
रेलवे स्टेशन का प्लेटफार्म खचाखच भरने से अधिकतर लोग प्यास बुझाने के लिए दौड़ते नजर आए। बारिश के बाद उमस से लोग बेहाल थे। प्यास बुझाने के लिए स्टेशन पर लगे नलों पर निर्भर रहे। नलों की संख्या कम होने और गर्म पानी की सप्लाई होने से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। कई नलों में सप्लाई भी बंद हो गई।
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विकलांग के हौसले को सलाम
परीक्षा में कई विकलांग अभ्यर्थी भी शामिल हुए। बिजनौर की शमा परवीन दोनों पैरों से विकलांग थी। भाइयों के साथ वह परीक्षा देने पहुंची थी। भाइयों ने ही उसे कक्ष तक पहुंचाया।
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