बिलारी। नगर के अब्दुल्ला पूर्वी में पुल वाले कब्रिस्तान के निकट स्थित हजरत इब्राहीम मुंडेशाह मियां के सालाना उर्स के कुलशरीफ में अकीदतमंदों की भारी भीड़ जुटी। इस दौरान चादरपोशी कर विशेष दुआएं भी मांगी गईं।
उर्स के मौके पर मुंडेशाह की दरगाह पर बड़ी संख्या में दूरदराज इलाकों से विभिन्न जातिवर्गों के अकीदतमंद पहुंचे। अकीदतमंदों ने दरगाह पर हाजिरी देकर चादरपोशी की और दुआएं मांगीं। महबूब कव्वाल और उनके साथियों ने रसूले अकरम और मुंडेशाह मियां की शान में नाते पाक और कव्वालियां पेश कीं। उर्स के दौरान शुक्रवार की रात दरगाह पर कव्वाली कार्यक्रम के दौरान भारी भीड़ लगी रही। शनिवार की सुबह लगभग साढ़े दस बजे दरगाह पर उर्स का कुलशरीफ हुआ। कुलशरीफ में रामपुर से आए सैयद इकबाल मियां और अन्य उलेमा ने तकरीर की।
इस दौरान कुरआने पाक की हिदायतों को मानने, रसूले अकरम की सुन्नतों पर चलने और सूफी संतों के बताए आदर्शों पर चलने पर जोर दिया गया। कुलशरीफ के दौरान अकीदतमंदों द्वारा इकट्ठा किए गए तबर्रूख पर फातिहा पढ़ी गई और सभी में तबर्रूख का वितरण किया गया। इस मौके पर दरगाह के सज्जादानशीं सूफी मोहम्मद आजम साबरी, कमेटी के सचिव रियासत हुसैन उर्फ जलाल साहब, शराफत हुसैन स्टार, मोहम्मद फरमान रजा, नजीर अहमद, मोहम्मद मेहरान, असलम साबरी, जावेद सैफी, कारी गुलाम अशरफ, कारी इख्तियार आलम, जावेद सैफी, अयाज सैफी, सगीर अहमद, जावेद सिद्दीकी, यूनुस, मोहम्मद इमरान, बब्लू मसूदी, मुमताज मसूदी, जाकिर मसूदी, जीशान आलम उर्फ गुड्डू आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।