बुधवार को लगातार दसवें दिन भी लेखपाल हड़ताल पर रहे। कलक्ट्रेट के दरवाजे पर लेखपालों ने धरना - प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। एस्मा लागू होने के बाद भी प्रशासन की ओर से लेखपालों की हड़ताल को खत्म कराने की कोई कोशिश अभी तक नहीं की गई है। इसका खामियाजा उन सैकड़ों छात्र - छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है जिन्हें स्कूल- कालेजों में दाखिले के लिए आय, जाति और निवास के प्रमाण पत्रों की दरकार है।
लेखपाल संघ के पदाधिकारी खुद दावा कर रहे हैं कि उन्होंने आय, जाति, निवास प्रमाण पत्रों के लिए ऑनलाइन आए 30,000 से अधिक आवेदनों पर रिपोर्ट नहीं लगाई है। लेखपाल की रिपोर्ट के बगैर प्रमाण पत्र नहीं बन सकते। इसकी वजह से छात्र - छात्राएं और उनके परिजन कभी तहसील तो कभी कलक्ट्रेट में भटक रहे हैं। हालांकि सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था के आदेश सभी जिलाधिकारियों को दिए हैं, लेकिन यह वैकल्पिक व्यवस्था बस कागजों तक सिमटी है। तहसील स्टॉफ ने प्रमाण पत्र जारी करने में साफ हाथ खड़े कर दिए हैं। शासन के निर्देश हैं कि यदि लेखपाल रिपोर्ट नहीं लगा रहे हैं तो जिलाधिकारी ग्राम सेवकों व अन्य कर्मचारियों से रिपोर्ट लगवाकर प्रमाण पत्र जारी कराएं। इसके बावजूद अधिकारियों ने जिले में कोई वैकल्पिक व्यवस्था लागू नहीं की है। बुधवार को भी उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के बैनर तले लेखपालों ने कलक्ट्रेट गेट पर धरना - प्रदर्शन करके नारेबाजी की। लेखपालों का कहना है कि वह आरपार की लड़ाई लड़ रहे हैं। मांगें पूरी होने तक हड़ताल खत्म नहीं होगी।
तुरंत काम पर लौटें लेखपाल: कमिश्नर
मुरादाबाद। मंडलायुक्त अनिल राजकुमार ने स्वीकार किया कि लेखपालों की हड़ताल की वजह से प्रमाण पत्र बनाने का काम ठप हुआ है। स्कूल - कालेजों में प्रवेश का समय होने की वजह से छात्र - छात्राओं को प्रमाण पत्र नहीं मिल पाने से परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि शासन की जानकारी में यह सभी तथ्य हैं। शासन ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह वैकल्पिक व्यवस्था के तहत ग्राम सेवकों से रिपोर्ट लगवाकर प्रमाण पत्र जारी कराएं। शासन ने लेखपालों की हड़ताल को प्रतिबंधित करके एस्मा लागू किया है। मुख्यमंत्री भी लेखपालों से काम पर लौटने या बस्ते जमा कराने की बात कहकर साफ संदेश दे चुके हैं। कमिश्नर ने कहा कि कार्रवाई के लिए सभी जिलों में प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। लेखपालों को तुरंत काम पर लौट आना चाहिए।