रमजान भीषण गर्मी में होने के चलते खानपान पर ध्यान देने की जरूरत है। ज्यादा गर्मी में बर्फ और केमिकल से पकाए गए कुछ फल सेहत पर भारी पड़ सकते हैं। विशेषज्ञों ने मौसम और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर खानपान का निर्धारण करने की सलाह दी है। मस्जिदों में तरावीह पढ़ने के लिए भी भीड़ उमड़नी शुरू हो गई है।
तेज गर्मी में राजेदारों को इफ्तार के समय प्यास सबसे ज्यादा सताती है। ज्यादातर स्थानों पर इफ्तार में बर्फ से ठंडा करके पानी रोजेदारों को पिलाया जाता है। लोग प्याज में ठंडा पानी पीकर आराम महसूस करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार बर्फ का यह ठंडा पानी सुकून देने के साथ ही सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। फैक्ट्रियों में बर्फ बनाने के दौरान स्वच्छता का ज्यादा ध्यान नहीं रखा जाता है। इसमें प्रयोग होने वाले पानी की गुणवत्ता भी मानक के अनुरूप नहीं होती है। यही कारण है कि फैक्ट्रियों का बर्फ फ्रिज के बर्फ से ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। बर्फ का पानी प्रयोग करने से प्यास कम होने की बजाय बढ़ती है। इससे गले व पेट को नुकसान हो सकता है। इसके साथ ही केमिकल व गैस से पकाया जाने वाला केला भी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। सावधानी के चलते फसलों को लाकर कुछ घंटे के लिए खुले में रख दें।
मुफती दानिश उल कादरी का कहना है कि रमजान का महीना एक ओर जहां सेहत के लिए फायदेमंद है, वहीं इसका दीनी महत्व भी बहुत ज्यादा है। रमजान में अल्लाह जन्नत व रहमत के दरवाजे खोल देता है। मुसलमानों पर फर्ज है कि रोजा रखे और लोगों में अल्लाह का जिक्र फरमाएं। इस पाक माह में अल्लाह की बख्सीश बरसती है। इसका फायदा उठना चाहिए। रमजान पर मस्जिदों में तरावीह पढ़ने वालों की भीड़ लग रही है। शाम को बाजारोें में रमजान का सामान खरीदने वालों की भीड़ लगी रही।
...