मुरादाबाद। वायु प्रदूषण के मामले में देशभर के कुछ शहरों में शामिल मुरादाबाद के लोग अब गेहूं की मड़ाई से भूसे के बारीक कणों से परेशान हैं। भूसे के कण हवा में घुलकर लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। इससे आंखों में जलन और चुभन के साथ एलर्जी की शिकायत होने लगी है। तेज हवा चलने पर दमे के मरीजों को सांस लेना दूभर हो रहा है। सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी में आंखों में जलन एवं एलर्जी से पीड़ित लोगों की संख्या अचानक बढ़ने लगी है।
पीतल भट्टियों का संचालन एवं ई कचरा जलाए जाने से मुरादाबाद में वायु प्रदूषण का स्तर काफी अधिक है। कई बार तो मुरादाबाद प्रदेश ही नहीं देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार हो जाता है। वहीं इन दिनों गेहूं की कटाई के साथ मड़ाई चल रही है। शहर के चारों तरफ ग्रामीण आबादी है। गेहूं की मड़ाई से भूसे के महीन कण हवा में उड़कर आ रहे हैं। बिना हेलमेट और चश्मा दोपहिया वाहन चलाने वालों को सबसे अधिक मुसीबत झेलनी पड़ रही है।
भूसे के कण आंखों में जाने से जलन और चुभन हो रही है। कणों से शरीर में एलर्जी की शिकायत भी बढ़ी है। जिला नेत्र चिकित्सालय के वरिष्ठ नेत्र सर्जन डा. आशुतोष अग्रवाल के मुताबिक ओपीडी में आंखों में इंफेक्शन के मरीजों की संख्या बढ़ी है। इनकी मुख्य वजह प्रदूषण के साथ गेहूं के भूसे के कण हैं। जिला अस्पताल के नेत्र रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डा. भावुतोष बताते हैं, ओपीडी में आंखों में चुभन और जलन की शिकायत के मरीज बढ़े हैं। इनमें देहात के साथ शहरी क्षेत्र लोग भी शामिल हैं। भूसे का कण चुभने से अल्सर बना सकता है। त्वचा रोग विशेषज्ञ डा. जेएल ममगाई के मुताबिक गर्मी में एलर्जी की शिकायत अधिक होती है। हवा में भूसे और धूल मिट्टी के कण इसकी वजह बनते हैं।
ठंडे पानी से धोएं आंखें
आंखों में जलन और चुभन की शिकायत होने पर कतई न मलें। इससे अंगुलियों की गंदगी आंखों में पहुंचने और लाल होने से संक्रमण की शिकायत बढ़ जाती है। ठंडे पानी से आंखों को धोएं और आराम नहीं मिलने पर डाक्टर के पास जाएं। त्वचा की एलर्जी से बचने के लिए पूरा शरीर ढकने वाले कपड़े पहनें और आंखों में चश्मा लगाए। इससे एलर्जी के साथ धूप से भी बचाव होगा।