इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का रविवार को वार्षिक अधिवेशन आईएमए कॉन-2019 आयोजित हुआ। इसमें उत्तरप्रदेश समेत कई प्रदेशों के नामी विशेषज्ञ डाक्टरों ने अनियमित खानपान एवं दिनचर्या से होने वाली बीमारियों एवं उनके इलाज के आधुनिक तकनीकी की जानकारी साझा की। डाक्टरों ने कहा कि अधिकतर लोगों ने अपनी खराब आदतों से शरीर को बीमारियों का घर बना दिया है। डाक्टरों ने बीमारियों से बचने का आसान 80 का फार्मूला बताया। कहा कि 80 के फार्मूले पर अमल किया जाए तो 80 साल से पहले बीमारियां नजदीक नहीं आएंगी।
दिल्ली रोड स्थित एक होटल में आयोजित अधिवेशन का शुभारंभ सीएमओ डा. विनीता अग्निहोत्री, इनकम टैक्स के ज्वाइंट कमिश्नर यदुवीर सिंह, आईएमए अध्यक्ष डा. बीपीएस लोचब, आईएमए कॉन-2019 के चेयरमैन डा. अनुराग मेहरोत्रा, सचिव मंजेश राठी और डा. सीपी सिंह ने किया। अधिवेशन में विशेषज्ञ डाक्टरों ने अनियमित दिनचर्या होने से होने वाली बीमारियों एवं चिकित्सा की आधुनिक तकनीक के अनुभव साझा किए। डाक्टरों ने कहा कि हमारी जीवन शैली पूरी तरह बदल गई है। शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम होने से बीमारियां जकड़ रही हैं।
डाक्टरों ने कहा कि खराब जीवनशैली से दिल के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। समय पर इलाज नहीं होने से जान गंवानी पड़ रही है। डाक्टरों ने कहा कि दिल को दुरुस्त रखने के लिए लो ब्लड प्रेशर, बुरे कोलेस्ट्रॉल का स्तर, आराम की स्थिति में धड़कन, खाली पेट शुगर और कमर का घेरा 80 सेंटीमीटर तक रखें। इससे अधिक और कम होने पर प्रत्येक दो साल पर स्क्रीनिंग जरूर कराएं। एक बार में 80 ग्राम से अधिक कैलोरी नहीं लें। प्रतिदिन 80 कदम चलें। फेफड़ों की कार्य प्रणाली को 80 प्रतिशत तक बनाए रखें। चिकित्सकों ने हृदय रोग, न्यूरोलॉजी, बाल रोग, सर्जरी, महिला रोग, रेडियोलॉजी क्षेत्र में अपनाई जा रही आधुनिक तकनीक की जानकारी भी दी। अधिवेशन में डा. परमजीत सिंह, डा. रजनीश मेहरोत्रा, डा. मनोज सिंहल, डा. राजुल रस्तौगी, डा. सिद्धार्थ मेहरोत्रा, डा. अभिनव बनर्जी, डा. संगीता जैन, डा. अनुराग मेहरोत्रा, डा. गौरव गुप्ता समेत दर्जनों डाक्टर मौजूद रहे।
मुरादाबाद बना मेडिकल हब
आईएमए अध्यक्ष डा. बीपीएस लोचब ने कहा कि दिल्ली, लखनऊ और बरेली के बाद मुरादाबाद चिकित्सा क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुका है। देश एवं विदेश के मरीज सस्ता एवं बेहतर इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
- लड़कियों के देरी से शादी करने, धूम्रपान, मदिरा सेेवन, जंग फूड खाने से अंडाणु बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। इससे बांझपन की समस्या बढ़ी है। इंफेक्शन और ट्यूब बंद होने से भी महिलाएं गर्भधारण नहीं कर पा रही हैं। आधुनिक चिकित्सा में 80 फीसदी मामलों में इलाज संभव है। 20 फीसदी मामलों में टेस्ट ट्यूब बेबी से महिलाएं संतान सुख ले रही हैं। - डा. संगीता जैन
- गठिया का रोग अब बुढ़ापे की बीमारी नहीं रही है। अनियमित जीवन शैली से युवाओं में गठिया की शिकायत बढ़ रही है। खासकर, महिलाओं में इसकी अधिक शिकायत हो रही है। आधुनिक चिकित्सा में कारगर इलाज है। समय पर इलाज नहीं होने पर हाथ और पैर मुड़ने जैसी स्थिति में पहुंच जाते हैं। - डा. परमजीत सिंह
- खराब खानपान बीमारियों की मुख्य जड़ है। धूम्रपान हृदय रोग और स्ट्रोक की बड़ी वजह बन रहा है। धूम्रपान छोड़ने के एक साल के भीतर ही दिल का दौरा और स्ट्रोक का खतरा आधा रह जाता है। - डा. अनुराग मेहरोत्रा,
- आधुनिक चिकित्सा तकनीक एवं दवाओं से किडनी ट्रांसप्लांट आसान हो गया है। किडनी ट्रांसप्लांट के लिए अब मरीज और डोनर का ब्लड ग्रुप मैच न होना कोई मायने नहीं रखता है। आधुनिक तकनीकी आने से ट्रांसप्लांट का खर्च भी कम हुआ है। - डा. मनोज सिंहल